चंदौली जिले की महिलाओं का सपना हुआ पूरा: पहली बार गांव से निकलीं 40 महिलाएं, यूपी पुलिस ने कराए काशी विश्वनाथ के दर्शन, भ्रमण..
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के दूरदराज पांडी गांव की करीब 40 महिलाओं का एक सपना आखिरकार पूरा हो गया है। ये महिलाएं अपने परिवारों के साथ पहली बार अपने गांव से बाहर निकलीं और वाराणसी पहुंचीं। इनमें से कई ने इससे पहले कभी किसी बड़े शहर नहीं गईं थीं।
सोमवार सुबह इन महिलाओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए। यह पल उनके लिए बेहद खास था क्योंकि सालों से ये महिलाएं बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने की इच्छा रखती थीं। उनका यह सपना उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से पूरा हुआ।
आपको बता दें कि पिछले सप्ताह मिशन शक्ति अभियान के तहत यूपी पुलिस ने पांडी गांव में एक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने गांव की महिलाओं से बातचीत की। बातचीत में महिलाओं ने बताया कि वे जीवन में एक बार काशी विश्वनाथ के दर्शन करना चाहती हैं लेकिन आर्थिक और अन्य कारणों से कभी जा नहीं सकीं।
महिलाओं की इस इच्छा को सुनकर यूपी पुलिस ने उनके लिए वाराणसी की यात्रा का पूरा इंतजाम किया। इसके बाद 40 महिलाओं और उनके परिवारों का समूह वाराणसी पहुंचा जहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और वर्षों पुराना सपना साकार हो गया।
बाहरी दुनिया से कटा हुआ है पांडी गांव
उत्तर प्रदेश- बिहार सीमा के पास पांडी नाम का दूरदराज गांव है। यह गांव लंबे समय से बाहरी दुनिया से लगभग कटा रहा है। यहां की कई महिलाओं का पूरा जीवन पांडी गांव तक ही सीमित रहा है और उन्हें कभी गांव से बाहर जाने का अवसर नहीं मिला।
पांडी गांव वाराणसी से लगभग 120 किलोमीटर दूर है लेकिन इसके एकांत और दुर्गम स्थान पर होने के कारण वहां के अधिकांश निवासियों के लिए यह यात्रा अब तक संभव नहीं हो पाई थी।
यात्रा में शामिल महिलाओं में से एक प्रभावती कुमारी ने कहा, ”हमारा गांव बिहार की सीमा पर स्थित है और चारों ओर जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के दूरदराज होने के कारण हम लंबे समय तक बाहरी दुनिया से लगभग कटे रहे।”
उन्होंने आगे कहा, ”जब पुलिस अधिकारियों ने हमसे पूछा कि क्या हम वाराणसी घूमने जाना चाहेंगे तो सभी महिलाओं ने तुरंत हामी भर दी। हममें से ज्यादातर ने पहले कभी किसी शहर को नहीं देखा था।” प्रभावती अपने पति अमेरिका खरवार और अपने दो बच्चों के साथ इस यात्रा पर गईं।
पहली बार गांव से निकलीं ये महिलाएं
पुलिस ने किया बस का इंंतजाम
वाराणसी घूमने जाने वालीं अधिकतर महिलाओं की उम्र 40 वर्ष से ज्यादा थी। पुलिस ने इनके लिए बस का इंतजाम किया था। इनमें से कई अपने छोटे बच्चों को भी साथ लेकर गई थीं। गांव के पांच पुरुष भी इस तीर्थ यात्रा में शामिल हुए।
पूरी यात्रा के दौरान सहायता प्रदान करने के लिए एक निरीक्षक (इंस्पेक्टर) रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस का एक दल अलग वाहन से उनके साथ चला। यह काफिला सुबह करीब 9 बजे गांव से रवाना हुआ। यात्रियों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी पुलिस ने ही की थीं।
चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक में स्थित पांडी एक दलित बहुल गांव है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर और बिहार सीमा से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
करीब 80 परिवारों वाले इस गांव की आजीविका मुख्य रूप से गुजारे लायक खेती, दिहाड़ी मजदूरी और जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर है। अधिकांश परिवारों की आय इतनी ही होती है कि वे भोजन और कपड़ों जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। वहीं गांव के केवल कुछ युवा ही रोजगार की तलाश में बाहर गए हैं।
पूरा हुआ जीवनभर का सपना
अपने चार वर्षीय बच्चे के साथ यात्रा पर गईं बीना कुमारी ने कहा, ”हमारा हमेशा से सपना था कि हम अपने गांव से बाहर निकलें लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करना उससे भी बड़ा सपना था। हमने इस मंदिर के बारे में केवल अपने माता-पिता और दादा-दादी से ही सुना था।”
उन्होंने आगे कहा, ”जब अधिकारियों ने हमसे पूछा कि हम क्या देखना चाहते हैं तो हमने बताया कि हमारी सबसे बड़ी इच्छा काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की है। उन्होंने हमारा यह सपना पूरा करने का वादा किया था और आज उन्होंने अपना वादा निभा दिया। पुलिस ने पूरी यात्रा के दौरान हमारी हर तरह से मदद की और हमें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हम मंदिर के अंदर खड़े होकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर पाएंगे।”
महिलाओं का यह समूह वाराणसी में अन्य धार्मिक जगहों जैसे संकट मोचन मंदिर और दुर्गा मंदिर भी दर्शन करने गया। इसके अलावा खबरें हैं कि महिलाओं को मॉल भी ले जाया गया।
तीर्थयात्रा में शामिल संतोष कुमार ने कहा कि गरीबी, परिवहन सुविधाओं की कमी और गांव के दूरदराज बसे होने के कारण अधिकतर ग्रामीण कभी वाराणसी नहीं जा सके।
गांव के एक अन्य निवासी सुशील खरवार ने कहा, ”आज शाम हम अपने घर लौट जाएंगे लेकिन यह यात्रा हममें से कोई भी कभी नहीं भूल पाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, ”हमने देखा कि शहर कितना बड़ा है और वहां कितना विकास हुआ है। हमारे गांव में तो मोबाइल फोन का नेटवर्क भी मुश्किल से काम करता है। इस यात्रा ने हमें हमारे जंगलों के बाहर की दुनिया से परिचित कराया और हमारी सोच का दायरा बढ़ा दिया।”
संपर्क करने पर वाराणसी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) वैभव कृष्ण ने बताया कि हाल ही में उनके गांव दौरे के दौरान ग्रामीणों ने वाराणसी घूमने की इच्छा जताई थी। इसके बाद इस यात्रा का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा, ”कई ग्रामीणों ने हमें बताया कि वे कभी वाराणसी नहीं गए और न ही उन्होंने कभी किसी बड़े शहर को देखा है। यह सुनने के बाद हमने उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत उनके लिए इस तीर्थयात्रा का आयोजन करने का फैसला लिया ताकि वे शहर के प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकें और अपने गांव से बाहर की दुनिया का अनुभव प्राप्त कर सकें।”
यूपी के गांवों में बड़ा बदलाव, एक लाख से अधिक घरों में लगेंगे लघु बायोगैस संयंत्र
उत्तर प्रदेश में गांवों के एक लाख से अधिक घरों में लघु बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य गो संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी घरेलू बचत बढ़ाना है। सरकार की मंशा है कि ग्रामीण परिवार कम लागत में अपने घरों पर ही मिनी बायोगैस संयंत्र लगाकर रसोई गैस के खर्च में बड़ी कमी ला सकें।