यूपी में जमीन मालिकों की लगी लॉटरी !!! योगी सरकार का बड़ा फैसला, मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे
लखनऊ राज्य, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में जमीन, मकान और दुकान जैसे प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य में जमीन और संपत्ति से जुड़े तमाम कामों को बेहद आसान और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार एक बहुत बड़ा बदलाव करने की पूरी तैयारी में है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि आम जमीन मालिकों को रजिस्ट्री, मालिकाना हक के सत्यापन और नामांतरण (दाखिल-खारिज) जैसी पेचीदा सरकारी प्रक्रियाओं में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े और पूरी व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल व पारदर्शी बन सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य के स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने संपत्ति प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार को लेकर एक नया और मजबूत खाका तैयार किया है, जिससे आम जनता को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
संपत्ति की पहचान होगी आसान और सुरक्षित
योगी सरकार प्रदेश की ग्रामीण और शहरी सभी प्रकार की संपत्तियों को एक खास और अलग पहचान देने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत राज्य की हर संपत्ति के लिए एक 'यूनिक प्रॉपर्टी आईडी' विकसित की जाएगी। यह खास आईडी जीआईएस (GIS) मैपिंग और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड से पूरी तरह जुड़ी होगी। इससे फायदा यह होगा कि किसी भी जमीन या मकान से जुड़ी पूरी जानकारी, जैसे उसका असली मालिकाना हक, पुराना रिकॉर्ड और अन्य जरूरी विवरण एक क्लिक पर ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी दस्तावेजों के सहारे होने वाली धोखाधड़ी और गलत स्वामित्व के मामलों पर पूरी तरह से रोक लगाने में बड़ी मदद मिलेगी।
रजिस्ट्री के बाद अब अपने आप हो जाएगा नामांतरण
उत्तर प्रदेश के जमीन मालिकों के लिए सबसे बड़ी राहत नामांतरण यानी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को लेकर होने वाली है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के अनुसार, जैसे ही किसी संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होगी, उसका नामांतरण का प्रोसेस अपने आप (स्वतः) ही सिस्टम में शुरू हो जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में लोगों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराने के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसमें महीनों का समय खराब होता है। लेकिन यह नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आम जनता के समय और मेहनत दोनों की भारी बचत होगी।
संपत्ति के फर्जीवाड़े पर लगेगी पूरी तरह लगाम
अक्सर देखा जाता है कि प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में भोले-भाले लोग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। सरकार इसी फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए पंजीकरण व्यवस्था में आमूलचूल सुधार करने जा रही है। नए प्रस्तावित बदलावों के तहत, किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके असली मालिकाना हक और कानूनी अधिकारों की बारीकी से जांच करने वाली व्यवस्था को बेहद मजबूत किया जाएगा। इसके चालू होने से विवादित जमीनों की अवैध बिक्री और गलत या जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।
उत्तर प्रदेश में हर जमीन को मिलेगा अपना 'भू-आधार'
राज्य में भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह से आधुनिक और अपडेटेड बनाने के लिए सरकार हर भूमि पार्सल को एक यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) देने जा रही है, जिसे 'भू-आधार' का नाम दिया गया है। इस विशेष डिजिटल पहचान के मिल जाने से जमीन के सभी रिकॉर्ड्स पहले से कहीं ज्यादा सटीक और स्पष्ट हो जाएंगे। इसके साथ ही भूमि संबंधी किसी भी जानकारी को आसानी से किसी भी ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा, जिससे विवादों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
बिजली-पानी और टैक्स रिकॉर्ड को एक साथ करने की तैयारी
सरकार की इस नई व्यवस्था में सिर्फ जमीन का रिकॉर्ड ही डिजिटल नहीं होगा, बल्कि संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स), बिजली कनेक्शन, पानी और सीवर जैसे महत्वपूर्ण विभागों के रिकॉर्ड को भी एक ही साझा प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच किसी भी संपत्ति की जानकारी का आदान-प्रदान बेहद आसान हो जाएगा और आम नागरिकों को सभी सरकारी सेवाएं एक ही जगह पर बेहतर और तीव्र तरीके से उपलब्ध हो सकेंगी।
जानिए इस नई व्यवस्था से आम लोगों को क्या-क्या सीधे फायदे मिलेंगे
उत्तर प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी डिजिटल व्यवस्था जैसे ही पूरी तरह लागू होगी, राज्य के जमीन और मकान मालिकों को कई बड़े और सीधे लाभ मिलने शुरू हो जाएंगे।
सबसे पहला फायदा यह होगा कि किसी भी संपत्ति की पूरी जानकारी घर बैठे ऑनलाइन बेहद आसानी से मिल जाएगी। इसके अलावा, नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया में गजब की तेजी आएगी, जिससे दलालों का चक्कर खत्म होगा। बाजार में होने वाली फर्जी रजिस्ट्री और जमीनी विवादों के मामलों में भारी कमी देखने को मिलेगी।
सरकारी रिकॉर्ड्स में दर्ज डेटा पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगा, जिससे गलतियों की संभावना न के बराबर रह जाएगी। इन सब सुधारों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आम जनता को मामूली कामों के लिए सरकारी विभागों और दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।