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पत्थर बरसाए व नाचते हुए निकले निहंग, गुरुद्वारे में 70 घंटे तनाव के बाद नए विवाद की आशंका.. सभी भेजे गए पंजाब...

पत्थर बरसाए व नाचते हुए निकले निहंग, गुरुद्वारे में 70 घंटे तनाव के बाद नए विवाद की आशंका.. सभी भेजे गए पंजाब...

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चल रहा विवाद हल हो गया। पंजाब से आए आठ सदस्यीय शिष्टमंडल से वार्ता के बाद पांचों निहंगों को मंगलवार दोपहर बाद पंजाब रवाना कर दिया गया है। निहंग तो मानकर चले गए लेकिन, अब भी तनाव खत्म नहीं हुआ है। अंतिम दिन निहंग सिखों को बिना किसी कार्रवाई के छोड़े जाने पर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा जैसी स्थिति बनी रही, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना रहा। इतना ही नहीं, जाते-जाते निहंग पुलिस के सामने नाचते और जयकारे लगाते हुए रवाना हुए। स्थानीय लोग इस प्रकरण पर पुलिस को तहरीर सौंपेंगे। वे निहंगों पर कार्रवाई चाहते हैं।

कैसे माने निहंग, क्या हुई वार्ता

मंगलवार सुबह 10 बजे से गुरुद्वारे में सरगर्मी रही। गुरुद्वारे के भीतर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। पूर्वाह्न 11.30 बजे सतज्ञानी हरनाम सिंह खालसा भिंडरावाले और आनंदपुर पंजाब से जत्थेदार बाबा अजीत सिंह की मौजूदगी में आठ सदस्यीय शिष्टमंडल गुरुद्वारे पहुंचा। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन और निहंगों की बातचीत हुई। करीब तीन घंटे तक चली वार्ता के बाद सहमति बनी। शाम चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंगों ने जयकारे लगाए। चार निहंग दो मोटरसाइकिलों पर रवाना हुए जबकि एक निहंग वाहन से गया।

जत्थेदार बाबा अजीत सिंह बोले- हम सभी शांति चाहते हैं

आनंदपुर पंजाब से आए जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि हम सभी शांति चाहते हैं। उत्तराखंड में रहने वाले सभी लोग हमारे भाई हैं। निहंगों में कर्णप्रयाग की घटना को लेकर आक्रोश था। गुरुद्वारे पर कब्जे की बात गलत है। वह अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। पुलिस के भय के कारण वे छत पर चढ़ गए थे। उन्होंने कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। कर्णप्रयाग की घटना में पुलिस-प्रशासन अपना कार्य कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने भी इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल मौके पर मौजूद थे तो मामले का समाधान पहले ही क्यों नहीं किया गया। चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा जैसी स्थिति बनी रही, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना रहा।

युवा नेता मोहित डिमरी ने कहा कि यह सरकार और प्रशासन की विफलता है। शांत माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया। चार दिनों तक सरकारी मशीनरी के साथ ही स्थानीय लोगों को परेशानी में डाला गया किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत एवं जिपंस संपंन नेगी ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

निहंगों पर कोई ऐक्शन न होने से लोगों में गुस्सा

तनावपूर्ण स्थिति को कम कर प्रशासन और पुलिस राहत की सांस ले रहा हो, किंतु लोग कह रहे हैं कि चार दिनों तक चले घटनाक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर में तनाव, तोड़फोड़ और भय का माहौल बना रहा, बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। वही स्थानीय लोगों ने निर्णय लिया है कि इस संबंध में शीघ्र जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से भेंट कर तहरीर सौंप जाएगी।

चार दिन आईटीबीपी तैनात रही, तनाव का माहौल था

नगरासू क्षेत्र में बीते चार दिनों से तनाव का माहौल था। पूरे मामले के चलते पुलिस, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बलों की यहां तैनाती बनी रही। गुरुद्वारा प्रबंधन बेहंत सिंह की ओर से भी परिसर में तोड़फोड़, अव्यवस्था और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद भी विवाद खत्म होने के बाद निहंग सिखों को बिना किसी कार्रवाई के पंजाब रवाना कर दिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

निहंग नाचते और जयकारे लगाते रवाना हुए

यही नहीं जाते-जाते निहंग पुलिस फोर्स के सामने नाचते और जयकारे लगाते हुए रवाना हुए। स्थानीय निवासी गौरव चौधरी ने कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस पर पथराव किए जाने के साथ ही धारदार हथियारों के प्रदर्शन हुए। चार दिनों तक पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, किंतु संबंधित लोगों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। आक्रोशित लोगों ने कहा कहा कि इस मामले में शीघ्र क्षेत्र से एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से भेंट कर इस घटनाक्रम को लेकर तहरीर सौंपेगा।

रात को हाईवे पर की निहंगों ने पत्थरबाजी

सोमवार रात को निहंगों ने एक बार फिर से पत्थरबाजी की। इसे नगरासू क्षेत्र में लोगों में दहशत थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें छेड़ने का प्रयास किया गया इसलिए उन्होंने ऊपर से पत्थरबाजी की।

प्रशासन जो कार्रवाई करेगा वह हमें मंजूर

वार्ता के लिए आए शिष्टमंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्णप्रयाग मामले में जो भी हुआ वह दुखद था। प्रशासन और पुलिस जो भी मामले में कार्रवाई करेगी वह हमें मंजूर होगी। उन्होंने कहा कि हम यही संदेश देना चाहते हैं कि जो भी श्रद्धालु यात्रा पर आ रहे हैं वह बेखौफ आएं किंतु किसी तरह से कानून को हाथ में लेने का काम न करें। लड़ाई झगड़े जैसी स्थिति को पैदा ही न होने दें।