यहां पुरुष करते हैं 'घूंघट', शादी के बाद पत्नी के घर जाता है दूल्हा; जानिए क्या है ? इस अनोखी परंपरा का राज...
Tuareg Tribe Men Wear Veil: दुनिया में आज भी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो सुनने में लोगों को हैरान कर देती हैं। कुछ समाजों में रीति रिवाज ऐसे होते हैं, जो हमारी सामान्य सोच से बिल्कुल अलग होते हैं। ऐसी ही एक अनोखी और रहस्यमयी संस्कृति सहारा रेगिस्तान में रहने वाली तुआरेग जनजाति की है, जहां महिलाओं के बजाय पुरुष घूंघट पहनते हैं और शादी के बाद पति पत्नी के घर जाकर रहने लगते हैं। यह जनजाति अपनी अनोखी परंपराओं, नीले रंग की पहचान और मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है।
पुरुष पहनते हैं घूंघट, महिलाओं का चेहरा खुला रहता है
भारत और कई अन्य देशों में आमतौर पर महिलाएं घूंघट या पर्दा करती हैं, लेकिन तुआरेग समाज में यह पूरी तरह उल्टा है. यहां पुरुष अपने चेहरे और सिर को नीले रंग के खास कपड़े से ढकते हैं, जिसे वहां की भाषा में 'टैगेलमस्ट' कहा जाता है. यह कपड़ा न सिर्फ उनकी सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि रेगिस्तान की तेज धूप, धूल और रेत से उनका बचाव करता है।
यहां लड़के जब 25 साल के होते हैं, तभी उन्हें यह घूंघट पहनाया जाता है। इसके बाद ही वे किसी भी सार्वजनिक जगह पर हमेशा चेहरा ढककर रखते हैं. इसी वजह से इन्हें सहारा के नीले पुरुष भी कहा जाता है, क्योंकि समय-समय के साथ इस कपड़े का नीला रंग उनके चेहरे पर भी उतर आता है, जिससे उनकी पहचान और भी खास बन जाती है।
शादी के बाद पति जाता है पत्नी के घर
तुआरेग जनजाति की सबसे चौंकाने वाली बात उनकी शादी और परिवार व्यवस्था है. यहां शादी के बाद पुरुष अपने घर में नहीं रहता, बल्कि वह पत्नी के घर जाकर शिफ्ट हो जाता है. यह समाज पूरी तरह मातृसत्तात्मक (matrilineal) व्यवस्था पर आधारित है. इसका मतलब यहां वंश और संपत्ति मां की लाइन से आगे बढ़ती है. बच्चों की पहचान भी मां के परिवार से जुड़ी होती है।
संपत्ति और तंबू पर महिलाओं का अधिकार
तुआरेग समाज में घर या तंबू महिला की संपत्ति माना जाता है. शादी के समय भी महिला ही अपना तंबू लेकर आती है. पशुधन और घरेलू सामान भी अक्सर महिलाओं के पास होता है. अगर किसी कारण से तलाक होता है, तो पुरुष को ही घर छोड़कर जाना पड़ता है, जबकि बच्चे अपनी मां के साथ ही रहते हैं. समाज में महिलाओं को यह अधिकार है कि वे अपनी इच्छा से शादी करें और जरूरत पड़ने पर तलाक भी ले सकती हैं।
महिलाओं की आजादी और मजबूत भूमिका
तुआरेग समाज में महिलाएं काफी स्वतंत्र होती हैं. वे न सिर्फ परिवार संभालती हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक कामों में भी सक्रिय रहती हैं. यहां महिलाएं ही व्यापार करती हैं, बाजारों में काम करती हैं और सामाजिक फैसलों में भी अपनी भूमिका निभाती हैं. महिलाएं पारंपरिक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी खुलकर हिस्सा लेती हैं।
फिर भी नेतृत्व पुरुषों के हाथ में
हालांकि यह समाज महिलाओं को काफी अधिकार देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा नेतृत्व उनके पास है. जनजाति के प्रमुख और सरदार आमतौर पर पुरुष ही होते हैं। लेकिन खास बात यह है कि यह नेतृत्व भी मां की वंश परंपरा के आधार पर आगे बढ़ता है. इसका मतलब सत्ता और परंपरा दोनों में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रहती है।
क्यों पहनते हैं पुरुष घूंघट?
तुआरेग पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला नीला घूंघट सिर्फ परंपरा नहीं है, बल्कि इसकी व्यावहारिक वजह भी है। क्योंकि यह समुदाय सहारा रेगिस्तान की कठोर जलवायु में रहता है। ऐसे में यह कपड़ा उन्हें धूल, रेत और तेज धूप से बचाता है। धीरे धीरे यह कपड़ा उनकी पहचान बन गया और आज यह उनकी संस्कृति का हिस्सा माना जाता है।
कहां रहते हैं तुआरेग लोग?
यह जनजाति मुख्य रूप से माली, नाइजर, अल्जीरिया, लीबिया और बुर्किना फासो जैसे देशों के रेगिस्तानी इलाकों में रहती है। आज के समय में शिक्षा और शहरी जीवन के प्रभाव के कारण कुछ युवा अब इन परंपराओं से दूर हो रहे हैं, लेकिन गांवों में यह संस्कृति आज भी मजबूत बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर चर्चा में यह संस्कृति
हाल के वर्षों में तुआरेग जनजाति की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए हैं. लोग इसे देखकर हैरान भी होते हैं और इसे उल्टी परंपरा भी कहते हैं. कुछ लोग इसे महिला सशक्तिकरण का उदाहरण मानते हैं, जबकि कुछ इसे केवल एक अलग सांस्कृतिक व्यवस्था के रूप में देखते हैं. काफी लोगों का मानना है कि यह उनकी जरूरत और परंपरा का एक हिस्सा है।
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