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यौमे आशूरा पर शहीदाने कर्बला की याद में काशी में निकला ताजियों का जुलूस, फन-ए-सिपहगरी का हुआ प्रदर्शन...

यौमे आशूरा पर शहीदाने कर्बला की याद में काशी में निकला ताजियों का जुलूस, फन-ए-सिपहगरी का हुआ प्रदर्शन...

-या हुसैन की सदायें गूंजी, मातमी माहौल, आँसुओं और ख़ून का नज़राना पेश, ताजियों के ठंडा करने का सिलसिला शुरू 

वाराणसी, 26 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में दसवीं मुहर्रम (यौमे आशूरा) पर शुक्रवार को शहरी और ग्रामीण अंचल में अलग-अलग जगहों पर ताजिये इमामबाड़ों में ठंडे किए गए। जनपद में दोपहर बाद से ही सड़कों पर या हुसैन की सदाएं गूंजने लगी। 

कड़ी सुरक्षा के बीच शिया समुदाय के युवा, बच्चे और बुर्जुग जुलूस के साथ इमाम चौकों पर रखे ताजियों को लेकर मातमी माहौल में या हुसैन की सदा के बीच इमामबाड़ों के लिए निकले। ताजियों को कांधा देने के लिए लोगों में होड़ लगी रही। जगह -जगह समाजसेवी संगठनों ने शरबत और तबर्रुक का वितरण कैंप लगाकर किया।

जुलूस के रास्ते में युवाओं और किशोरों ने पटा-बनेठी समेत युद्ध कौशल (फन-ए-सिपहगरी) का प्रदर्शन किया। जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर भीड़ जुटी रही। कई जगहों पर खंजर और कमा का मातम भी हुआ। मातम करने वालों का शरीर खून से लथपथ दिखा। लेकिन उनका भाव रहा घाव लग जाये तो कोई गम नही, खून बह जाये तो कोई फिक्र नहीं, इमाम हुसैन की शहादत के आगे हर दर्द कम है।

ताजिये के जुलूस में रांगे का ताजिया, बुर्राक का ताजिया, जरी वाला ताजिया, पीतल वाला ताजिया, थर्माकोल व वेलवेट के ताजिये, तुर्बत का ताजिया लोगों में आकर्षण का केन्द्र रहे। शहर के अर्दली बाजार, दालमंडी, नई सड़क, मदनपुरा, बजरडीहा आदि इलाकों से ताजिया दरगाहे फातमान की ओर रवाना हुईं। शिवाला इमामबाड़ा की और गौरीगंज के अलावा बजरडीहा व मदनपुरा की ताजिया निकलीं। आदमपुर में तेलियाना, हनुमान फाटक, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा होते हुए सरैया स्थित कर्बला तक ताजिया जुलूस निकाला। देर रात तक दरगाह फातमान, लाट सरैैंया, इमामबाड़ा व भवनियां (भेलूपुर) में ताजियों के ठंडा करने का सिलसिला चलता रहेगा। नौवीं और दसवी मोहर्रम पर हजारों लोगों ने रोजा भी रखा। शाम को मगरिब की अजान के साथ लोगों ने खजूर से रोजा इफ्तार किया। सुबह कर्बला के शहीदों के नाम पर घरों में फातिहा भी पढ़ी गई।

इसके पहले गुरूवार शाम को शहर और ग्रामीण अंचल में ताजियों को इमाम चौकों पर बैठाने की रस्म अदा की गई थी। रखे गए। शाम से ताजिये की जियारत करने और फातिहा पढ़ने वालों की भीड़ उमड़ी रही। शहर के दालमंडी, नई सड़क, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, सरैया, जलालीपुरा, जैतपुरा, पीलीकोठी, बड़ी बाजार, रसूलपुरा, शिवाला, बजरडीहा, लोहता, रामनगर, हुकुलगंज, तेलियाबाग आदि इलाकों में देर रात तक बच्चे और महिलाएं ताजिया देखने के लिए उमड़ती रही। 

शहर के मशहूर ताजिये रांगे, नगीना, जरी, बुर्राक, पीतल, शीशम, चपरखट के ताजिये की जियारत के लिए खासी भीड़ जुटी रही। उधर,सुन्नी समुदाय के लोगों ने मलीदा और शर्बत की फातिहा के साथ ताजिए स्थापित किए। नदेसर में देर रात ताजिया प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के ताजिएदारों ने भाग लिया।

--नौवीं मोहर्रम पर रात भर खुले रहे अज़ाखाने, गूँजता रहा पारंपरिक नौहा

वाराणसी जिले की सभी 29 हुसैनी अंजुमने 09 वीं मोहर्रम पर रात भर जोश-ओ-ख़रोश और अक़ीदत के साथ अपने-अपने इलाक़ों के विभिन्न अज़ाखानों में अलम लेकर पहुँचती रहीं। नौवीं मोहर्रम की इस ख़ास रात पूरे बनारस के सभी छोटे-बड़े अज़ाखाने रात भर (पूरी रात) अज़ादारों और ज़ायरीन के लिए खुले रहे। नौवीं मोहर्रम की रात बनारस की विशिष्ट पहचान रखने वाला अपनी नवैयत का अनूठा और भव्य 'दूल्हा का जुलूस' शिवाला से पूरी शिद्दत के साथ उठाया गया, जिसमें हज़ारों की संख्या में अज़ादार शामिल हुए। इसके बाद देर रात अंजुमन हैदरी चौक का गश्ती अलम जब दरगाहे फातमान (लल्लापुरा) पहुँचेगा, तो वहाँ भोर में करीब 4 बजे अज़ादारों ने धधकते हुए अंगारों (आग) पर चलकर इमाम हुसैन की याद में 'अंगारों का मातम' किया।

-10 वीं मुहर्रम को इमाम हुसैन और उनके 71 साथी शहीद हुए थे

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर के सन् 61 हिजरी में 10वीं मुहर्रम को इमाम हुसैन व उनके 71 भूखे-प्यासे साथियों को जालिम यजीदी सेना ने कर्बला के मैदान में शहीद कर दिया था। उसी की याद में हम लोग जुलूस निकाल कर इमाम हुसैन के प्रति अपने जज्बातों को व्यक्त करते हैं।