वाराणसी :: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले बगैर पंजीकरण के चल रहीं दर्जनों कोचिंग, नियमों पर भारी शिक्षा का कारोबार...
वाराणसी, ब्यूरो। शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड, इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। हर प्रमुख इलाके में छोटे - बड़े कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश बिना वैध पंजीकरण के चल रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान समय में शहर में केवल 90 कोचिंग संस्थानों का ही पंजीकरण वैध है, जबकि हजारों छात्र - छात्राएं सैकड़ों कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच यह बड़ा अंतर नियमों के पालन और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करता है। मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि कई संस्थानों ने वर्षों पहले एक बार पंजीकरण तो कराया, लेकिन उसके बाद कभी नवीनीकरण नहीं कराया। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग संस्थान भी हैं, जिन्होंने आज तक पंजीकरण ही नहीं कराया।
90 का है वैध प्रमाणपत्र
कोचिंग अधिनियम-2000 लागू होने के बाद से अब तक 1145 कोचिंग संस्थानों ने पंजीकरण कराया। नियम के अनुसार पंजीकरण की वैधता तीन वर्ष होती है और इसके बाद नवीनीकरण आवश्यक है। लेकिन अधिकांश संचालकों ने पहली बार पंजीकरण कराने के बाद दोबारा आवेदन ही नहीं किया। परिणाम यह है कि वर्तमान में सिर्फ 90 संस्थानों का पंजीकरण वैध है। शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कूल शिक्षा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, बैंकिंग, एसएससी, रेलवे और अन्य कोर्स की तैयारी कराने वाले सैकड़ों से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां दसियों हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
पंजीकरण के लिए कई औपचारिकताएं
कोचिंग संस्थान का संचालन करने के लिए संचालक को कोचिंग अधिनियम-2000 के तहत आवेदन करना होता है। इसके साथ नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र, संचालक का आधार और पैन कार्ड, अग्निशमन विभाग की एनओसी, एनबीसी के अनुरूप प्रमाणपत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। पंजीकरण शुल्क भी विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार निर्धारित है। 200 छात्रों तक की क्षमता वाले संस्थान के लिए 10 हजार रुपये तथा 200 से अधिक छात्रों वाले संस्थान के लिए 25 हजार रुपये शुल्क जमा करना होता है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद तीन वर्ष के लिए पंजीकरण जारी किया जाता है।
नियमों से बचने की कोशिश
कई संचालक अग्निशमन सुरक्षा, भवन संबंधी मानकों और अन्य नियमों का पालन करने से बचने के लिए पंजीकरण नहीं कराते। कई संस्थान किराये के भवनों में संचालित होते हैं, जहां अग्निशमन और भवन सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हो पाते। ऐसे में पंजीकरण कराने से पहले उन्हें कई सुधार करने पड़ते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च आता है। यही वजह है कि कई संचालक बिना पंजीकरण के ही संस्थान चलाना बेहतर समझते हैं।
पिछले महीने 50 संस्थानों को नोटिस
शिक्षा विभाग ने पिछले महीने 50 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किया। इन संस्थानों से पंजीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभाग का कहना है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती
बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई कम दिखाई देती है. इसकी सबसे बड़ी वजह विभाग में कर्मचारियों की कमी है। सीमित स्टाफ के कारण नियमित निरीक्षण संभव नहीं हो पाता. शिकायत मिलने या विशेष अभियान चलने पर ही जांच की जाती है।
छात्रों की सुरक्षा पर भी खतरा
पंजीकरण केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है।इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि संस्थान में अग्निशमन सुरक्षा, आपातकालीन निकास, भवन की मजबूती और अन्य सुरक्षा मानक पूरे हों। बिना पंजीकरण चल रहे कई संस्थानों में ये व्यवस्थाएं नहीं हैं. ऐसे में किसी भी हादसे की स्थिति में छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती है।
आंकड़ों की तस्वीर
वर्ष 2000 से अब तक पंजीकरण: 1145
वर्तमान में वैध पंजीकरण: 90
पिछले महीने जारी नोटिस: 50
शुल्क स्ट्रक्टर
200 छात्रों तक: ₹10,000
200 से अधिक छात्रों पर: ₹25,000
पंजीकरण की वैधता अवधि: 3 वर्ष
शहर में कोचिंग संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन विभाग में निरीक्षण के लिए पर्याप्त कार्मिक उपलब्ध नहीं हैं। सीमित स्टाफ के कारण सभी संस्थानों की नियमित जांच कर पाना संभव नहीं हो पाता। इसके बावजूद शिकायत मिलने पर और विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। पिछले महीने 50 संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं। बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों को हर हाल में नियमों का पालन करना होगा।
-- डॉ ज्ञान प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, वाराणसी।