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काशी में ब्रिक्स बैठक का आगाज: चमकेगी यूपी की कला और संस्कृति, जुटने लगे दुनियाभर के राजनयिक और नीति-निर्माता...

काशी में ब्रिक्स बैठक का आगाज: चमकेगी यूपी की कला और संस्कृति, जुटने लगे दुनियाभर के राजनयिक और नीति-निर्माता...

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। जी-20 बैठकों की शानदार और सफल मेजबानी से दुनिया भर में वाहवाही बटोरने के बाद अब वाराणसी में ब्रिक्स (BRICS) संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक का शंखनाद होने जा रहा है।

आज 4 और 5 जून को शहर के प्रतिष्ठित ताज होटल में प्रस्तावित इस दो दिवसीय हाई-प्रोफाइल बैठक में देश-विदेश के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ और विशिष्ट प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश सरकार द्वारा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन और रोजगार सृजन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि काशी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और कला को प्रस्तुत करने का यह स्वर्णिम अवसर मिला है। 

इस बैठक की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह मुस्तैद है, ताकि जी-20 की तरह ही इस आयोजन को भी वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बनाया जा सके। ब्रिक्स देशों के संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के 30 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

विदेशी मेहमानों का हुआ जोरदार स्वागत

ब्राजील के लुकास गोडॉय विलेला, चीन के झांग हॉलिन और तेंगयुआन हे, दक्षिण अफ्रीका की प्रतिनिधि क्लीन नोआ, जोसेफ मोकगेथी और मसाना चिकेका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की फातिमा अलसुबैदी और शथा अलमुल्ला का वाराणसी वाराणसी पहुंचने पर काशी की सांस्कृतिक परंपरा के साथ जोरदार स्वागत किया गया। लोक कलाकारों ने धोबिया, करमा और नटवरी जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। छात्र-छात्राओं ने भी अलग-अलग देशों के झंडे लहराकर अतिथियों का अभिनंदन किया। स्वागत के जरिये ही विदेशी प्रतिनिधियों को काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्शन कराए गए। भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई।

विदेशी मेहमानों की गवाह बनेगी 'जीआई' उत्पादों की प्रदर्शनी

इस महाबैठक के दौरान काशी के विश्व प्रसिद्ध जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग और ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में वाराणसी की समृद्ध शिल्प परंपरा के 6 राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित शिल्पियों द्वारा तैयार 6 विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये उत्पाद सदियों पुरानी बनारसी कला, बेजोड़ शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। 

इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को न केवल इन उत्पादों की विशिष्टता और खूबसूरती से रूबरू कराना है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपने हुनर को सीधे वैश्विक बाजार (ग्लोबल मार्केट) तक पहुंचाने का एक बड़ा मंच देना भी है।

प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बनेंगे ये बनारसी उत्पाद

खासतौर पर हथकरघा से तैयार वस्त्र, रेडीमेड गारमेंट्स, सूती एवं सिल्क परिधान, डिजाइनर साड़ियां, ड्रेस मटेरियल, बेडशीट, हैंडलूम कपड़े, कुर्ते और बच्चों के परिधानों की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

* वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज (लकड़ी के खिलौने)
* बनारस गुलाबी मीनाकारी क्राफ़्ट
* बनारस ब्रोकेड एण्ड साड़ी
* वाराणसी सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क
* बनारस मेटल रिपोजी क्राफ्ट
* बनारस ग्लास बीड्स (कांच के मोती)

ब्रिक्स के ये शक्तिशाली देश लेंगे हिस्सा

वाराणसी में होने जा रही इस बैठक में ब्रिक्स समूह के प्रमुख सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे शक्तिशाली और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल हैं। इन देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलने और निर्यात की नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।

'लोकल से ग्लोबल' होने का बड़ा मौका

पद्मश्री रजनीकांत (जीआई विशेषज्ञ) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से बेहद बड़ा मंच मिलता है। ब्रिक्स जैसी बड़ी बैठक में हैंडीक्राफ्ट के प्रदर्शन से हमारे स्थानीय शिल्पियों के हाथ के हुनर को 'लोकल से ग्लोबल' मार्केट में सीधी एंट्री मिलेगी। रामेश्वर सिंह (नेशनल अवार्डी, वाराणसी वुडेन लेकर एंड टॉयज) कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी जी खुद हमारे जीआई व ओडीओपी उत्पादों के सबसे बड़े ब्रांड अंबेसडर हैं। उन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प को नई पहचान देकर दम तोड़ती प्राचीन कला को दोबारा जीवित कर दिया है। इस मंच से विदेशी मेहमान कला की बारीकियों को जानेंगे और भविष्य में बड़े ऑर्डर्स मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसी प्रकार कुञ्ज बिहारी (नेशनल अवार्डी, गुलाबी मीनाकारी) मानते हैं कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत को सीधे विश्व पटल पर रखने का बेहतरीन मौका है। ऐसे बड़े अवसर हमारी सदियों पुरानी विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।

हस्तशिल्प को नई पहचान

उन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प को नई पहचान देकर दम तोड़ती प्राचीन कला को दोबारा जीवित कर दिया है। इस मंच से विदेशी मेहमान कला की बारीकियों को जानेंगे और भविष्य में बड़े ऑर्डर्स मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसी प्रकार कुञ्ज बिहारी (नेशनल अवार्डी, गुलाबी मीनाकारी) मानते हैं कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत को सीधे विश्व पटल पर रखने का बेहतरीन मौका है। ऐसे बड़े अवसर हमारी सदियों पुरानी विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।