वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन का क्या है गंज शाहिदा मस्जिद विवाद, जिसकी आंच पाकिस्तान तक पहुंच गई?, जानें प्रशासन ने क्या कहा?...
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पास मौजूद गंज शाहिदा मस्जिद को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी बढ़ गई है। रेलवे प्रशासन ने कुछ दिन पहले मस्जिद खाली कराने के लिए नोटिस भेजा था। रेलवे प्रशासन का तर्क है कि यह मस्जिद अवैध निर्माण पर बनी है, साथ ही स्टेशन के विस्तार की योजना में बाधा बन रही है, इसलिए नोटिस भेजा गया।
गंज शहिदा मस्जिद पर फैसले को लेकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने विरोध जताया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। एक तरफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि मस्जिद के खिलाफ की जा रही कार्रवाई अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सही नहीं है। वहीं दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्रालय ने भी आसिफ अली के बयानों को खारिज कर दिया।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने 20 जून को गंज शहीदा मस्जिद को लेकर अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया था, जिसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उन्हें कड़ा जवाब दिया। जानकारी के लिए बता दें कि 13 जून को रेलवे प्रशासन ने मस्जिद परिसर खाली कराने का नोटिस भेजा था, जिसके बाद यह विवाद बढ़ता जा रहा है।
क्या है गंज शहीदा विवाद?
वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पास गंज शहीदा मस्जिद है, जिसके बारे में रेलवे प्रशासन का दावा है कि यह अवैध निर्माण है। इसी वजह से रेलवे प्रशासन ने मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजा। जबकि मस्जिद कमेटी का दावा है कि इस मस्जिद का 1000 साल पुराना इतिहास है, जिसका दस्तावेज वह रेलवे प्रशासन को दिखाएगें।
मस्जिद को लेकर आसिफ अली ने क्या कहा?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चिंता जताई थी। उनका मानना है कि भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर खतरा मंडरा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'मैं भारत में मौजूद मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता व्यक्त करता हूं। यही खतरा अब वाराणसी की 1000 साल पुरानी गंज शहीदा मस्जिद पर भी मंडरा रहा है।'
इसके आगे उन्होंने भारत सरकार से कार्रवाई रोकने की अपील की थी, ताकि मस्जिद को न तोड़ा जाए। साथ ही भारत सरकार को संदेश दिया कि ऐसी कार्रवाई से भारत में सांप्रदायिक अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।
भारत सरकार ने आसिफ को दिया जवाब
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आसिफ के बयानों का विरोध किया। इस बयान को लेकर प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा, 'भारत सरकार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयानों को पूरी तरह खारिज करती है। किसी भी हालत में उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।'
इसके बाद रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह हैरानी की बात है कि जो देश खुद मानवाधिकारों को लेकर सवालों के घेरे में है, वह भारत को उपदेश दे रहा है। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है। अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास रहा है।'