अयोध्या राम मंदिर :: चढ़ावा विवाद में SIT जांच पूरी, ट्रस्ट के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने के दिए गए निर्देश...
अयोध्या, न्यूज। उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच का पहला चरण पूरा हो गया है। तीन सदस्यीय एसआईटी अपनी छह दिन कीपड़ताल पूरी कर अयोध्या से लखनऊ लौट आई है। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
टीम अब प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसे जल्द ही सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, जांच का शुरुआती चरण बेहद अहम माना जा रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।
एसआईटी रिपोर्ट में चढ़ावे की काउंटिंग, रेकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी और आभूषणों के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर शुरुआती निष्कर्ष शामिल होंगे। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और बैंक से जुड़े लोगों समेत 140 से ज्यादा व्यक्तियों से पूछताछ की है और दान प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को खंगाला है। कई बिंदुओं पर गहन जांच अभी बाकी बताई जा रही है। रविवार को एसआईटी के सीएम से मिलने की भी चर्चा थी। हालांकि, सरकार के प्रवक्ता ने किसी भी मुलाकात एवं रिपोर्ट सौंपे जाने से इनकार किया है।
जारी किए गए हैं निर्देश
अयोध्या में राम मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। राम मंदिर से जुड़े सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए।
सूत्रों ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।
महाकुंभ के दौरान अनियमितता
सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता महाकुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों तथा कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
अन्य खरीदों की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच केवल धन के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच में ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट ने बाजार भाव से लगभग 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर करीब 71 एकड़ जमीन खरीदी है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया था।
तीन सदस्यीय कमिटी हुई गठित
राम मंदिर चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। कमिटी में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। जांच के दौरान एसआईटी ने कैश काउंटिंग प्रक्रिया, बैंकिंग चैनल, गर्भगृह में चढ़े आभूषणों के रेकॉर्ड और सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की विस्तृत समीक्षा की है।
बताया जा रहा है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करेगी कि किन मामलों में विस्तृत जांच की जरूरत है और क्या समय-सीमा बढ़ाना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि जांच के बाद मंदिर प्रबंधन की प्रक्रिया को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।