कौशल विकास के लिए अब देशभर में बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्किल ट्रेनिंग का स्थायी ढांचा सूचीबद्ध बनाने का प्रयास...
नई दिल्ली। कौशल विकास के लिए 12 साल से चल रहे प्रयासों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाने के कारण केंद्र सरकार लगातार योजनाओं-नीतियों में बदलाव करती जा रही है। अस्थायी कौशल प्रशिक्षण केंद्र, गैर मानक प्रशिक्षण, उद्योगों की मांग से अभ्यर्थियों के कौशल का मेल न खाने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने देशभर के स्थायी कौशल प्रशिक्षण केंद्रों को सेंटर आफ एक्सीलेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के रूप में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव बनाया है।
यह प्रयास कौशल प्रशिक्षण में एकरूपता, विश्वसनीयता, व्यावहारिकता लाने के लिए है। साथ ही निगरानी का ऐसा ढांचा प्रस्तावित है, जिसमें केंद्र सरकार के स्तर से ही चार समितियां इन केंद्रों के प्रदर्शन का आकलन करेंगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटरों को सूचीबद्ध
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटरों को सूचीबद्ध करने के लिए प्रस्तावित गाइडलाइन्स में स्पष्टत: कहा गया है कि अभी स्किल ट्रेनिंग के लक्ष्य पूरे करने के लिए अस्थायी प्रशिक्षण केंद्रों पर निर्भरता, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में एकरूपता की कमी, ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में असमानता, असेसमेंट व विश्वसनीयता में कमी, प्रशिक्षण का उद्योगों की जरूरत से मेल न खाना जैसी चुनौतियां हैं।
सरकार मानती है सेंटर आफ एक्सीलेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण दूर करने से यह समस्या दूर हो सकती हैं। वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर भी कुछ भिन्न मानकों के साथ सेंटर आफ एक्सीलेंस की तरह ही काम करेंगे। प्रस्तावित गाइडलाइन्स के अनुसार, वर्तमान में जो स्थायी स्किल ट्रेनिंग सेंटर चल रहे हैं, उन्हें मानकों पर परखकर सेंटर आफ एक्सीलेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के रूप में मान्यता देकर सूचीबद्ध किया जाएगा।
वन-स्टॉप स्किलिंग हब के तौर पर तैयार
देशभर में मौजूद स्थायी और एडवांस्ड ट्रेनिंग सेंटर को उनकी लोकेशन और सेक्टर के आधार पर वन-स्टॉप स्किलिंग हब के तौर पर तैयार किया जाएगा। इन केंद्रों पर ट्रेनिंग के लिए मंत्रालय ने छह सेक्टर चुने हैं। इनमें हैवी इंडस्ट्री एंड एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन, लाजिस्टिक्स, मोबिलिटी एंड ट्रेड, एमएसएमई एंड लाइड मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज एंड वेलनेस और डिजिटल-ग्रीन।
हर केंद्र इनमें से से किसी एक सेक्टर या उससे अधिक सेक्टर में विशेषज्ञता के साथ प्रशिक्षण देगा। एक सेक्टर के तहत कई पाठ्यक्रम हो सकते हैं। इन केंद्रों को ट्रेनिंग के लिए डिजिटल एंड फिजिकल कंटेंट तैयार करना होगा।
इम्पैनलमेंट के लिए सरकारी और निजी आइटीआइ, पालिटेक्निक कालेज, केंद्र व राज्य सरकारों के कौशल प्रशिक्षण संस्थान, उद्योग समूहों या अन्य संस्थाओं द्वारा संचालित संस्थान, जो कि मानक पूरे कर सकेंगे, वह आवेदन कर सकेंगे।
प्लेसमेंट से भी होगा केंद्रों की क्षमता का आकलन अब तक देखा गया है कि कौशल प्रशिक्षण देने के बाद इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता कि उनमें से कितनों को रोजगार या स्वरोजगार मिला। सेंटर आफ एक्सीलेंस को यह भी करना होगा।
उन्हें प्रशिक्षण लेने वालों को मेंटरशिप देनी होगी। चयन के समय काउंसिलिंग, जॉब मार्केट के अनुरूप कोर्स का सुझाव, प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंटर में मदद, प्लेसमेंट के बाद ट्रैकिंग का भी दायित्व होगा।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में स्टीयरिंग कमेटी- मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में क्वालिटी एश्योरेंस कमेटी- मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक्जीक्यूटिव कमेटी- मंत्रालय के निदेशक की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट टास्क फोर्स यह समितियां निगरानी करेंगी।