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'तुम कोई कलेक्टर हो क्या?'... MBBS डॉक्टर ने दिल पर ली बात और बन गई आईएएस अफसर!!

'तुम कोई कलेक्टर हो क्या?'... MBBS डॉक्टर ने दिल पर ली बात और बन गई आईएएस अफसर!!

नई दिल्ली (Priyanka Shukla IAS Success Story).। कभी-कभी किसी की कड़वी बात या कोई बड़ा ताना पूरी जिंदगी की दिशा बदल देता है. आईएएस प्रियंका शुक्ला की अफसर बनने की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ से साल 2006 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद प्रियंका डॉक्टर के रूप में देश की सेवा कर रही थीं. उनके परिवार और खासकर उनके पिता का सपना था कि वे सिविल सर्विस में जाएं, लेकिन प्रियंका के लिए डॉक्टरी की पढ़ाई और मेहनत को छोड़कर नए क्षेत्र में कदम रखना इतना आसान नहीं था।

डॉक्टरी के पेशे में रमी प्रियंका शुक्ला को यूपीएससी की राह पर लाने के लिए बहुत बड़े झटके की जरूरत थी.. और वह झटका उन्हें मेडिकल ट्रेनिंग के दौरान मिला. झुग्गी-झोपड़ी के दौरे पर गईं डॉ. प्रियंका शुक्ला को एक आम महिला से ऐसा ताना मिला कि उसने उनका दिल झकझोर दिया. उन्होंने उसी पल देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी को क्रैक करने का मन बना लिया. जानिए कैसे एक डॉक्टर ने स्टेथोस्कोप छोड़कर प्रशासनिक व्यवस्था की कमान संभाली, उनके संघर्ष की कहानी क्या थी और उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया 73वीं रैंक कैसे हासिल की. पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी।

'तुम कोई कलेक्टर हो क्या?'- इस ताने ने बदल दी जिंदगी

एमबीबीएस पूरा करने के बाद डॉ. प्रियंका शुक्ला लखनऊ के एक स्लम एरिया (झुग्गी) में अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में गई हुई थीं. वहां उन्होंने देखा कि एक महिला अपने बच्चों को बेहद गंदा और असुरक्षित पानी पिला रही थी. डॉक्टर होने के नाते प्रियंका शुक्ला ने ममता और चिंता भाव से उस महिला को टोकते हुए ऐसा अस्वच्छ पानी पीने से मना किया. प्रियंका की बात सुनकर उस महिला को न जाने क्यों गुस्सा आ गया और उसने बेहद रूखे लहजे में पलटकर कहा- तुम कोई कलेक्टर हो क्या?

प्रियंका ने हैरान होकर पूछा कि वह ऐसा क्यों कह रही हैं तो महिला का जवाब था कि अगर तुम्हें हमारे गंदा पानी पीने की इतनी ही चिंता है तो तुम्हें कलेक्टर होना चाहिए था. यह बात प्रियंका के दिल में तीर की तरह चुभ गई. उन्हें अहसास हुआ कि डॉक्टर के रूप में वह बीमारियां ठीक कर सकती हैं, लेकिन समाज की बुनियादी व्यवस्था को सुधारने की ताकत सिर्फ 'कलेक्टर' के पास होती है. बस इसी के बाद डॉ. प्रियंका शुक्ला यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।

पिता का सपना और मां की ममता बनी ताकत

प्रियंका के पिता हरिद्वार में तैनात थे और उसी विभाग में काम करते थे, जिसके मुखिया वहां के जिला मजिस्ट्रेट (DM) थे. उनके पिता हमेशा से अपनी बेटी के नाम की नेमप्लेट अपने घर के आगे 'कलेक्टर' के रूप में देखना चाहते थे. लेकिन इस लंबे सफर में जब भी प्रियंका शुक्ला को असफलता का डर सताता या हौसला डगमगाता तो वह अपनी मां को फोन करती थीं. मां के शब्द प्रियंका के लिए संजीवनी बूटी का काम करते थे और उन्हें अंदर से दोबारा मजबूत बना देते थे।

शॉर्टकट से तौबा और पहले प्रयास में फेलियर से सीख

प्रियंका ने तैयारी से पहले यूपीएससी सिलेबस को 4-5 हिस्सों में बांट दिया. उन्होंने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की NCERT किताबों को अपना आधार बनाया. प्रियंका आज के एस्पिरेंट्स को सलाह देती हैं कि यूपीएससी की तैयारी में शॉर्टकट ढूंढने की गलती न करें. अपने पहले प्रयास में प्रियंका को असफलता का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि 1 साल का गैप लेकर कमियां सुधारीं और 2008 में फिर परीक्षा दी. इस लंबी प्रक्रिया ने उन्हें सिखाया कि सिविल सर्विसेज के सफर में धैर्य सबसे बड़ा हथियार है।

भूगोल ऑप्शनल के साथ मिली रैंक 73

यूपीएससी सीएसई के दूसरे प्रयास में डॉ. प्रियंका शुक्ला ने समय पर सिलेबस पूरा किया और भूगोल को वैकल्पिक विषय चुना. उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी 2009 के नतीजों में उन्होंने 73वीं रैंक हासिल की. उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला, जहां वे अपनी बेहतरीन प्रशासनिक क्षमता के लिए मशहूर हैं. प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने के साथ ही आईएएस प्रियंका शुक्ला पेंटर, डांसर, कैलिग्राफर, डूडलर, कुक और कवयित्री भी हैं. वे आज के युवाओं के लिए ऑलराउंडर रोल मॉडल हैं।