Ram Lalla Donation: रामलला के चढ़ावे पर डाका डालने वालों का 'पड़ोसी कनेक्शन' आया सामने, पुलिस भी रह गई दंग...
Ram Lalla Donation Row: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे की रकम पर हाथ साफ करने वाले शातिर चोरों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। रामलला के दरबार में हुई इस महा-सेंधमारी की जांच में जुटी पुलिस ने जब आरोपियों का पूरा इतिहास खंगाला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि इस घिनौने अपराध में पकड़े गए 8 मुख्य आरोपियों में से 5 आरोपी कोई अनजान नहीं, बल्कि एक-दूसरे के बेहद करीबी पड़ोसी और रिश्तेदार हैं.इनके घरों की आपसी दूरी महज 100 से 200 मीटर के भीतर है, जिसने अब जांच की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है।
चंदे पर नजर रखने वालों का एक ही मोहल्ला
जांच एजेंसियों ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर इन आरोपियों के ठिकानों का मुआयना किया, तो इस सीक्रेट नेटवर्क की पूरी कड़ियाँ आपस में जुड़ती चली गईं. इस साजिश का मुख्य केंद्र अयोध्या की कौशलपुरी कॉलोनी बनकर उभरी है. यहाँ रहने वाले आरोपी लवकुश मिश्रा के घर के ठीक पीछे अविनाश शुक्ला का निवास स्थान है. ये दोनों घर एक-दूसरे से महज चंद कदमों की दूरी पर बने हैं. इसी कॉलोनी में थोड़ा आगे बढ़ने पर करीब 200 मीटर की दूरी पर तीसरे आरोपी अनुकल्प मिश्रा का आलीशान मकान मौजूद है. चौंकाने वाली बात यह है कि अनुकल्प ने यह मकान लगभग 2 साल पहले ही खरीदा था, जिसकी टाइमिंग को लेकर अब पुलिस को गहरा शक हो रहा है।
यादव बंधुओं के घर भी आपस में बिल्कुल सटे
इस महा-घोटाले का ताना-बाना सिर्फ एक मोहल्ले तक ही सीमित नहीं था. कौशलपुरी कॉलोनी के इस तिकड़ी नेटवर्क के अलावा, मामले के दो अन्य रसूखदार आरोपी मनीष यादव और टिन्नू यादव के घर भी आपस में बिल्कुल दीवार से सटे हुए हैं. इस तरह गणित लगाया जाए तो कुल 8 आरोपियों में से 5 लोग आपस में या तो पक्के पड़ोसी हैं या फिर एक ही कुनबे के सदस्य हैं. राम मंदिर जैसे अति-सुरक्षित स्थान पर एक ही इलाके के इतने लोगों का एक साथ शामिल होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह कोई अचानक की गई चोरी नहीं थी।
मोबाइल लोकेशन और पुराने रिश्तों को खंगाल रही एजेंसियां
अयोध्या पुलिस अब इस पूरे मामले को एक संगठित अपराध और सोची-समझी साजिश के एंगल से देख रही है. जांच अधिकारी अब इस मुख्य बिंदु पर काम कर रहे हैं कि मंदिर में नोटों की गिनती की ड्यूटी मिलने से पहले इन पांचों के बीच किस तरह के संबंध थे. क्या ये सभी लोग किसी गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप या कोड वर्ड के जरिए आपस में बातचीत करते थे? पुलिस की साइबर सेल अब इन सभी आरोपियों के मोबाइल फोन के पुराने लोकेशन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पिछले 2 सालों की पूरी एक्टिविटी को बारीकी से डिकोड करने में जुट गई है ताकि इस बड़ी साजिश के असली मास्टरमाइंड का चेहरा दुनिया के सामने लाया जा सके।