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ना जश्न, ना विक्ट्री परेड, विराट क्यों चले गए ? लंदन, पाटीदार भी पहुंच गए घर, क्यों RCB नहीं कर पाई जीत का सेलीब्रेशन? जानें...

ना जश्न, ना विक्ट्री परेड, विराट क्यों चले गए ? लंदन, पाटीदार भी पहुंच गए घर, क्यों RCB नहीं कर पाई जीत का सेलीब्रेशन? जानें...

नईदिल्ली, ब्यूरो। लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीतने के बाद विराट कोहली लंदन रवाना हो चुके है, कप्तान रजत पाटीदार एमपीएल की तैयारी में जुट गए वही टीम के बाकी खिलाड़ी अपने अपने घर जा चुके है. ऐसे में सवाल बड़ा ये है कि इस बार कोई भव्य जुलूस नहीं निकला न ही कोई अत्यधिक दिखावटी जश्न मनाया गया।सभी खिलाड़ियों ने होटल के भीतर ही अपनी जीत का जश्न मनाया।

सच्चाई यह है कि ऐसा ही होना चाहिए था आखिर क्यों जोखिम लिया जाए? क्यों सीमाओं को पार किया जाए? क्यों ऐसा आयोजन किया जाए जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो? क्यों ऐसी स्थिति बनाई जाए जो हाथ से निकल सकती है?आज हर आरसीबी फैन खुश है. कुछ लोग कह सकते हैं कि वे अपनी टीम की एक झलक देखना चाहते थे, लेकिन सच्चाई यह है कि भीड़ को नियंत्रित करना आसान नहीं होता और जब हजारों लोग चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास जमा होते हैं, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

जश्न ना मनाना कितना सही?

केएससीए और सरकार ने किसी बड़े जमावड़े की अनुमति न देकर सही निर्णय लिया. पुलिस भी पूरी तरह सतर्क रही. सूत्रों के अनुसार, लगातार निगरानी रखी गई ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे. 2025 में आरसीबी के लिए हालात बिगड़ गए थे. खिताब जीतने के बावजूद वे रातों-रात सबसे ज्यादा आलोचना झेलने वाली टीम बन गई थी. उन्हें सिर्फ आलोचना और नफरत का सामना करना पड़ा. ऐसे माहौल से निकलकर दोबारा लोगों का विश्वास जीतना एक बड़ी उपलब्धि है. खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को इसका श्रेय जरूर जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा तारीफ के हकदार फैंस हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में टीम का साथ दिया उनके लिए यह सादा जश्न शायद सबसे बेहतर नतीजा है।

2025 ने बहुत कुछ सीखा दिया

कई मायनों में 2025 एक सीख थी यह याद दिलाने वाली कि आपको वही करना चाहिए जिस पर आपका पूरा नियंत्रण हो. भारत में राजनीतिक रैलियां आम हैं और हम उनके आदी हैं, लेकिन यह एक अलग तरह का जश्न होता है. ऐसे आयोजन अक्सर जल्दबाजी में किए जाते हैं, जिससे पुलिस और प्रशासन को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिलता. 2025 में यही हुआ था, जब जुलूस नियंत्रण से बाहर हो गया था. इस बार, हालांकि, प्रशासन पूरी तरह तैयार था. फाइनल से पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे और सभी को बताया गया था कि क्या अनुमति है और क्या नहीं.अच्ची बात ये रही कि हर खिलाड़ी ने आरसीबी के फैंस के बारे में क्या कहा. यह खिताब उन लाखों समर्थकों को समर्पित किया गया है, जो हर समय टीम के साथ खड़े रहे यही बात इसे और खास बनाती है।

हर शहर अपना घर वाली थीम

आरसीबी को एक दूसरा मौका मिला है सच्चाई यह है कि जो कुछ हुआ उसके बाद वापसी का रास्ता आसान नहीं था. ऐसे में सावधानी बरतने का उनका फैसला बिल्कुल सही है। साथ ही, जुलूस न होने का मतलब यह नहीं कि फैंस का जुड़ाव कम हुआ है. जैसा कि वेंकटेश अय्यर ने कहा, "आरसीबी की सफलता के लिए लोगों ने प्रार्थनाएं और पूजा कीं, और लगभग हर कोई इस सफर का हिस्सा रहा. यह फ्रेंचाइजी के लिए एक शानदार सीजन रहा, और इसका अंत भी ऐसे ही होना चाहिए था कि हर कोई खुश रहे।