Headlines
Loading...
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष द्वितीया को सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीजगन्नाथ के भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा, अष्टकोणीय रथ को 3भक्तों ने खींचा

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष द्वितीया को सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीजगन्नाथ के भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा, अष्टकोणीय रथ को 3भक्तों ने खींचा

वाराणसी, न्यूज। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर गुरुवार को सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीजगन्नाथ के भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अष्टकोणीय रथ पर विराजमान होते ही काशी के 224 साल पुराने लक्खा मेला का आरंभ हो गया। 

भोर में मंगला आरती के बाद भगवान ने गर्भगृह से अपनी मनमोहक छवि का दर्शन दिया तो भक्त निहाल हुए. सुबह बदली के बीच इंद्रदेव ने प्रभु का स्वागत करते हुए उनके दिव्य रथ पर बारिश की बूंदे डाली. जय जय जगन्नाथ, हर हर महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने प्रभु को तुलसी का माला, नानखटाई, मेवा, मिष्ठान का भोग लगाया। 

भक्तिभाव में लीन श्रद्धालुओं ने प्रभु के रथ को पांच डग खींच कर अपनी नैय्या पार लगाने की कामना की. देर शाम तक रथयात्रा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से पटा रहा. दूर- दराज से भी श्रद्धालुओं ने मेला के पहले दिन भगवान का दर्शन किया और झूला, चरखी का लुत्फ उठाया।

विशेष पीत श्रृंगार किया गया

भोर में रथारूढ़ भगवान श्रीजगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की आकर्षक झांकी सजाई गई. परंपरानुसार तीनों विग्रहों का विशेष पीत (पीला) श्रृंगार किया गया. भगवान को पीले वस्त्रों, पीले फूलों से सजाया गया और भोग में भी पीले पेड़े अर्पित किए गए। 

सुबह नौ बजे चना, गुड़ और शरबत का भोग लगाने के बाद भक्तों ने श्रद्धापूर्वक रथ खींचना शुरू किया. रथ को पांच हाथ खींचकर परिक्रमा कराई गई और भक्तों ने रथ का स्पर्श कर खुद को धन्य महसूस किया। 

दोपहर भाेग आरती तक दर्शन चलता रहा. इसके बाद दोपहर में तीन घंटे के लिए पट बंद रहा। आरती के बाद फिर से दर्शन शुरू हो जो मध्य रात्रि पट बंद होने तक जारी रहा। मेला क्षेत्र में भक्तों का समूह हरे राम, हरे कृष्ण का संकीर्तन करता रहा।

नानखटाई, खिलौने की दुकानों पर रही भीड़

रथयात्रा चौराहा के दो किलोमीटर के मेला क्षेत्र में सजी नानखटाई, चाट- पकौड़ी और रंग-बिरंगे खिलौनों की दुकानों पर भीड़ देखी गई। लोग श्रद्धापूर्वक भगवान को तुलसी दल और नानखटाई का प्रसाद चढ़ा रहे थे।

पूड़ी, कोहड़ा की सब्जी, कटहल के आचार का लगा भोग

पहले दिन परंपरा निभाते हुए भगवान को पूड़ी, कोहड़ा की सब्जी, दही, देसी चीनी, कटहल और आम के आचार का भोग लगाया गया. पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने बताया कि भगवान के लिए मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर पूरी पवित्रता के साथ प्रसाद बनाया गया।

विश्वनाथ धाम में हुई श्रीसत्यनारायण की पूजा

भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा आरंभ होने पर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में गुरुवार को श्रीसत्यनारायण विग्रह का पूजन हुआ। विग्रह का विशेष श्रृंगार कर लोक कल्याण और शांति की कामना की गई।

गोद में लेकर भगवान को कराया गलियों का विचरण

200 साल पुरानी परंपरा के अनुसार काशी की गलियों से भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। धूपचंडी स्थित श्रीरामजानकी मंदिर से प्रारंभ होकर नाटीईमली, ईश्वरगंगी लोहटिया मैदागिन से होते हुए सुड़िया पहुंची। वहां भजन-कीर्तन कर खीर का भोग लगाया गया। 

शाम को भगवान को भक्तों ने गोद में भगवान को लेकर गलियों में विचरण कराते हुए रथ पर विराजमान कराया। रथ सुड़िया से ठठेरी बाजार, गोविंदपुरा काशीपुरा, जालपादेवी, पिपलानी से रामकटोरा होते हुये वापस चित्रकूट मंदिर पहुंचा। 

रथ के आगे डमरू दल, बैंड बाजे के साथ भगवान की जय जयकारा की गूंज से गलियों का माहौल पूरी तरह से रथयात्रा के उत्सव के रंग में रंगा रहा। 

इस दौरान सलिल अग्रवाल, सुयश अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, डा रचना अग्रवाल, आमोद अग्रवाल, बजरंग अग्रवाल, कृष्ण मोहन अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल मौजूद रहे।