चार साल पहले किया था एक वादा... आज भी निभा रहे हैं इंस्पेक्टर साहब ! छोटी बच्ची के लिए जो किया, जानकर सलाम करेंगे आप...
यूपी, ब्यूरो। जी हां अक्सर पुलिस की चर्चा अपराध, कानून-व्यवस्था और कार्रवाई को लेकर होती है, वहीं उत्तर प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी की संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।चार साल पहले एक सात साल की बच्ची को सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचते देखकर जिस इंस्पेक्टर ने उसकी जिंदगी बदलने का संकल्प लिया था, वह आज भी अपने उस वादे पर कायम हैं।
बताया जाता है कि तत्कालीन स्वार कोतवाल और वर्तमान में बदायूं के सिविल लाइंस थाने के प्रभारी निरीक्षक हरेंद्र सिंह ने न केवल बच्ची का एक निजी विद्यालय में दाखिला कराया, बल्कि उसकी 12वीं कक्षा तक की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा भी किया। सबसे खास बात यह है कि स्थानांतरण के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी। आज भी समय पर स्कूल की फीस जमा कराते हैं और किताबों, कॉपी तथा स्कूल ड्रेस के लिए आर्थिक सहायता भेजते हैं।
सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचती मिली थी मासूम
यह कहानी वर्ष 2022 की बताई जाती है। उस समय हरेंद्र सिंह रामपुर जिले के स्वार क्षेत्र में कोतवाल के रूप में तैनात थे। एक दिन उनकी नजर सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेच रही सात वर्षीय बच्ची गुनगुन पर पड़ी।
एक छोटी बच्ची को पढ़ाई की उम्र में काम करते देख उन्होंने उससे बातचीत की। बातचीत के दौरान पता चला कि परिवार बेहद आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और इसी कारण गुनगुन की पढ़ाई छूट गई है।
यहीं से एक ऐसी कहानी शुरू हुई जिसने न केवल उस बच्ची का भविष्य बदल दिया, बल्कि समाज के सामने पुलिस की मानवीय छवि का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
बीमारी और गरीबी ने रोक दी थी पढ़ाई
गुनगुन के पिता आदेश कुमार बताते हैं कि उनका परिवार मिट्टी के बर्तन बनाकर किसी तरह अपना जीवनयापन करता है। कुछ वर्ष पहले उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि वे लंबे समय तक बिस्तर पर रहे।
घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी पर आ गई, जो दूसरों के घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाने लगीं।
आर्थिक संकट इतना गहरा गया कि बेटी की स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी। मजबूरी में गुनगुन को स्कूल छोड़ना पड़ा और वह परिवार की मदद के लिए सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचने लगी।इंस्पेक्टर ने लिया बड़ा फैसला
जब तत्कालीन स्वार कोतवाल हरेंद्र सिंह ने परिवार की पूरी स्थिति जानी तो उन्होंने तुरंत मदद का निर्णय लिया।
उन्होंने गुनगुन का एक निजी विद्यालय में कक्षा तीन में दाखिला कराया और परिवार से वादा किया कि बच्ची की 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई का पूरा खर्च वे स्वयं उठाएंगे।
यह केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि एक ऐसे भविष्य में निवेश था जो गरीबी के कारण अंधेरे में खो सकता था।
स्थानांतरण के बाद भी नहीं भूले अपना वादा
अक्सर सरकारी अधिकारियों का स्थानांतरण होने के बाद ऐसे संपर्क समाप्त हो जाते हैं, लेकिन हरेंद्र सिंह के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
30 जून 2022 को उनका स्थानांतरण स्वार से बदायूं हो गया। वर्तमान में वे बदायूं जिले के सिविल लाइंस थाने में प्रभारी निरीक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
स्थानांतरण के समय उन्होंने गुनगुन और उसके परिवार को अपना मोबाइल नंबर दिया और कहा कि पढ़ाई से जुड़ी किसी भी जरूरत के लिए वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।
आज भी गुनगुन जब फीस, किताब, कॉपी या ड्रेस की आवश्यकता होती है तो फोन पर जानकारी देती है और हरेंद्र सिंह समय पर उसकी व्यवस्था कर देते हैं।
अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही है गुनगुन
सूर्या जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाचार्य महेंद्र पाल सिंह के अनुसार गुनगुन अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि स्कूल की फीस समय पर जमा हो जाती है और हरेंद्र सिंह समय-समय पर फोन कर बच्ची की पढ़ाई और प्रगति के बारे में जानकारी भी लेते रहते हैं।
विद्यालय के अनुसार गुनगुन पढ़ाई में मेहनती है और भविष्य में आगे बढ़ने का सपना देख रही है।
पिता बोले- अगर मदद न मिलती तो पढ़ाई छूट जाती
गुनगुन के पिता का कहना है कि यदि उस समय हरेंद्र सिंह मदद के लिए आगे नहीं आते तो उनकी बेटी की पढ़ाई हमेशा के लिए छूट सकती थी।
उनके अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में निजी विद्यालय की फीस भरना संभव नहीं था।आज उनकी बेटी नियमित रूप से स्कूल जाती है और बड़े सपने देखने लगी है। इसके लिए वे हरेंद्र सिंह को अपनी बेटी के भविष्य का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं।
पुलिस की मानवीय छवि का उदाहरण
समाज में पुलिस की भूमिका केवल अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं होती। कई बार पुलिस अधिकारी अपनी संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाते हैं।
हरेंद्र सिंह का यह कदम उसी मानवीय सोच का उदाहरण माना जा रहा है। उन्होंने यह साबित किया कि यदि इच्छा हो तो एक व्यक्ति भी किसी जरूरतमंद बच्चे का भविष्य बदल सकता है।
शिक्षा बदल सकती है जिंदगी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या आज भी कई क्षेत्रों में चिंता का विषय है।
यदि ऐसे बच्चों को समय पर सहयोग मिल जाए तो वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
गुनगुन की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिली मदद किसी बच्चे की पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकती है।
समाज के लिए प्रेरणा
हरेंद्र सिंह की पहल केवल एक परिवार की मदद नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। यदि सक्षम लोग अपनी क्षमता के अनुसार किसी एक बच्चे की शिक्षा का जिम्मा उठाएं, तो हजारों बच्चों का भविष्य संवर सकता है।
ऐसे उदाहरण यह संदेश देते हैं कि सामाजिक बदलाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से भी संभव है।
गुनगुन के सपनों को मिली नई उड़ान
आज गुनगुन एक निजी विद्यालय में पढ़ रही है। नियमित शिक्षा, किताबें, यूनिफॉर्म और समय पर फीस मिलने से उसका आत्मविश्वास बढ़ा है।
जो बच्ची कभी सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचने को मजबूर थी, वही अब अपनी पढ़ाई के जरिए बेहतर भविष्य बनाने का सपना देख रही है।
इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह की यह कहानी केवल एक पुलिस अधिकारी की नहीं, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और वचन निभाने की मिसाल है। चार साल पहले एक छोटी बच्ची से किया गया वादा आज भी पूरी ईमानदारी से निभाया जा रहा है। स्थानांतरण, नई जिम्मेदारियां और समय की कमी भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी।
गुनगुन की मुस्कान और उसकी जारी पढ़ाई इस बात का प्रमाण है कि किसी एक व्यक्ति का छोटा-सा निर्णय किसी जरूरतमंद बच्चे का पूरा भविष्य बदल सकता है। ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण समाज को यह संदेश देते हैं कि शिक्षा सबसे बड़ा उपहार है और जरूरतमंद बच्चों का हाथ थामना सबसे बड़ी मानव सेवा।