सीएम योगी ने प्रदेश में रोबोटिक्स,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,क्वांटम कंप्यूटिंग,सेमी कंडक्टर के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का दिया निर्देश..
लखनऊ राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी ने आज लखनऊ में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए उत्तर प्रदेश को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नोएडा में 75 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाली 'पार्क फॉर रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीपीयू क्लस्टर्स एंड एडवांस्ड टेक्निकल इनोवेशन (PRAGATI) परियोजना प्रदेश को विश्वस्तरीय रोबोटिक्स एवं एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का आधार प्रदान करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योग, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर ऐसा सशक्त डीप टेक इकोसिस्टम विकसित किया जाए, जहां नई तकनीकें तेजी से प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंच सकें।
मुख्यमंत्री जी ने लखनऊ और नोएडा में प्रस्तावित यू हब को केवल स्टार्टअप्स के लिए कार्यस्थल नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, उद्योग, निवेश, शिक्षण संस्थानों और प्रतिभाओं को जोड़ने वाले विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसा मंच तैयार किया जाए, जहां शोध प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों का व्यावसायीकरण हो, नवाचार को निवेश मिले और युवाओं को अनुसंधान से उद्यमिता तक आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं प्रमाणन की व्यवस्था विकसित करने तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी आईटी, डिजिटल सेवाओं और नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नीति को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक, निवेशक अनुकूल और रोजगारोन्मुख बनाया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने स्थानीय युवाओं के कौशल विकास, इंटर्नशिप, अनुसंधान, नवाचार एवं पेटेंट को प्रोत्साहन देने तथा निवेशकों को भूमि, अधोसंरचना एवं अन्य अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।