"कम उम्र में शादी करो नहीं तो होगी रेप", मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर भारी बवाल; बीजेपी नेताओं ने की चौतरफा आलोचना...
नई दिल्ली, न्यूज। ऑलइंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी अपने एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक बयान को लेकर देश भर में चर्चाओं और विवादों के केंद्र में आ गए हैं।इस बार उनका यह बयान महिलाओं, उनकी सुरक्षा और कम उम्र में शादी को लेकर आया है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
मौलाना साजिद रशीदी ने दावा किया है कि भारत में लड़कियों की शादी में देरी होने की वजह से बलात्कार (रेप) समेत अन्य गंभीर अपराधों की दर में लगातार इजाफा हो रहा है। उनके इस बयान की चारों तरफ जमकर आलोचना हो रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है।
'बेटियों की सुरक्षा चाहिए तो जल्दी कर दें शादी'
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के बावजूद यदि मुस्लिमों में भी 18 साल से कम उम्र की लड़कियों का निकाह होता है, तो उसे कानूनन गलत माना जाएगा और ऐसे मामलों में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद जब मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर बहस छिड़ी, तो मौलाना साजिद रशीदी ने विवादित बयान देते हुए कहा, "देश में रेप इसलिए हो रहे हैं क्योंकि शादियों में देरी हो रही है। अगर आप अपनी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो उनकी शादी जल्दी कर दें।"
बीजेपी नेताओं का तीखा पलटवार, देश छोड़ने तक की दी नसीहत
मौलाना रशीदी के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई वरिष्ठ नेताओं ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है।
सैयद शाहनवाज हुसैन का बयान: बीजेपी के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने रशीदी के बयानों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, "उनका यह बयान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे घृणास्पद बयान देकर वे पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्हें देश की आधी आबादी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए और अपने इस कृत्य के लिए तुरंत सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।"
बाबूलाल मरांडी का हमला: वहीं, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पर तीखा रुख अपनाते हुए यहाँ तक कह दिया कि जो लोग भारत के संविधान और देश के कानून के अनुसार नहीं रहना चाहते, उन्हें तुरंत यह देश छोड़ देना चाहिए।
चौतरफा घिरे तो मौलाना ने सफाई में अलापा 'सामाजिक सुधार' का राग
बयान पर मचे भारी सियासी बवाल और संभावित कानूनी शिकंजे के बीच मौलाना साजिद रशीदी की सफाई भी सामने आई है। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए अजीबोगरीब तर्क दिए और कहा, "मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि देश के मौजूदा हालात ही कुछ ऐसे हैं-जहां समलैंगिक विवाह जैसे कानून लाए जा सकते हैं और जहां एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है।
ऐसे समाज और देश में अगर कोई रेप या किसी अन्य बुरी घटना के जोखिम से बेटियों को बचाने के लिए उनकी जल्दी शादी करने का सुझाव देता है, तो उसे निश्चित रूप से एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया जाता है।"
मौलाना ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि शरीयत या किसी अन्य धर्म में बताई गई अच्छी बात को अपनाने में किसी को क्या बुराई हो सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज कानून बनाते हैं और उसे तोड़ते हैं, वही लोग उनके बयान को राजनीतिक रंग दे रहे हैं क्योंकि वे समाज में कोई वास्तविक सुधार नहीं देखना चाहते।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यह बात केवल सामाजिक सुधार के हित में कही थी, क्योंकि इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए। फिलहाल, इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक साजिद रशीदी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।