वाराणसी :: गुरु का आशीर्वाद हजार किताबों के ज्ञान से बढ़कर : मुनि भावसागर...अष्टाह्निका महापर्व का आज हुआ समापन...
वाराणसी, न्यूज। वाराणसी जिले के भेलूपुर थाना क्षेत्र दिंगबर जैन मंदिर में पिछले नौ दिनों से चल रहे अष्टाह्निका महापर्व का बुधवार को समापन हुआ। इस मौके पर विश्व शांति महायज्ञ के साथ कई मांगलिक क्रियाएं हुईं। अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र से शांति धारा संपन्न हुई।
धर्म सभा में मुनि भावसागर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उनका आशीर्वाद हजार पुस्तकों के ज्ञान से भी अधिक प्रभावशाली होता है। गुरु जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी गुरु की भूमिका को स्वीकार करता है। आज भले ही उन्हें मेंटर, टीचर या गाइड कहा जाए, लेकिन उनका कार्य वही है जीवन को दिशा देना।
इस मौके पर समाज के अध्यक्ष आरसी जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश जैन, समाज मंत्री विनोद जैन, कोषाध्यक्ष सौरभ जैन, प्रचार मंत्री किशोर जैन, पंडित कमलेश चंद जैन, हेमंत जैन, किरण जैन, अजीत जैन, पवन जैन, संजय जैन मौजूद थे।
वहीं, मुनि धर्म सागर ने लगातार तीसरे दिन निर्जल उपवास किया। इस दौरान 28 वें चातुर्मास का कलश स्थापित करने वालों का चयन हुआ। दो अगस्त को दोपहर एक बजे से कलश स्थापना कार्यक्रम होगा।