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एक्टर चंद्रचूड़ सिंह की 156 साल पुरानी हवेली कब्जाई, जमीनें बेचीं, चाची ने फर्जी वसीयत से हड़पी संपत्ति, 7 पर हुआ दर्ज FIR...

एक्टर चंद्रचूड़ सिंह की 156 साल पुरानी हवेली कब्जाई, जमीनें बेचीं, चाची ने फर्जी वसीयत से हड़पी संपत्ति, 7 पर हुआ दर्ज FIR...

एक्टर चंद्रचूड़ सिंह की अलीगढ़ में एक हवेली थी, जिस पर उनके चाचा-चाची ने धोखे से कब्जा कर लिया है। चाचा-चाची समेत 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। चंद्रचूड़ सिंह के भाई अभिमन्यु सिंह ने इस मामले को लेकर रोरावर थाने में FIR दर्ज कराई। साथ में चंद्रचू़ड़ सिंह भी थे। उन्होंने बताया कि उनके चाचा-चाची ने धोखे से फर्जी वसीयत तैयार करवाई और सारी जमीनें बेच दीं, हवेली पर कब्जा कर लिया।

चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई ने दर्ज करवाई एफआईआर में चाचा-चाची के अलावा 7 और लोगों का भी नाम लिखवाया है। एक्टर का कहना है कि उनके दादा जीते जी वसीयत लिखने की हालत में नहीं थे, पर जब वह नहीं रहे, तो चाचा-चाची ने अन्य लोगों के साथ मिलकर हवेली पर कब्जा जमा लिया और जमीनें बेच दीं।

हवेली पर कब्जे और जमीनें बेचने पर यह बोले चंद्रचूड़ सिंह

इस बारे में चंद्रचूड़ सिंह ने 'भारत समाचार' को दिए इंटरव्यू में बताया, 'अभी 7 व्यक्तियों के नाम लिए गए हैं, और भी नाम आएंगे। ये बेसिकली फ्रॉड और फॉर्जरी का केस है। मेरे दादाजी यहां जब बीमार थे, तो उस समय मेरी बुआजी थी यहां साथ में गवाह के तौर पर। दादाजी वसीयत बनाने की हालत में नहीं थे। उनके जाने के बाद उनके फर्जी सिग्नेचर लिए गए। और मेरे जो चाचा-चाची और छोटे दो बच्चे थे यहां पर...मेरे चाचा और चाची ने मिलकर ये वसीयत बनाई, जो फॉर्जरी है। जो सात लोग हैं, उनके नाम भी जुड़े हैं। वो गवाह भी हैं, वो इसमें शामिल भी हैं। उन्होंने जमीनें बेची हैं। जो जमीन सबके बराबर के हिस्से की थी।'

चंद्रचूड़ सिंह जमींदारों के परिवार से, आसपास के गावों में भी फैली जमीनें

बता दें कि चंद्रचूड़ सिंह के पिता कैप्टन बलदेव सिंह भारतीय सेना में अधिकारी रहे और फिर साल 1985 में वह सदर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। उनके परिवार की गिनती अलीगढ़ के पुराने जमींदार परिवारों में की जाती है। उनकी जमीनें जलालपुर के अलावा आसपास के कई गांवों में फैली हैं, जिनमें घर के सभी लोगों का बराबर का हिस्सा है। हालांकि, इन जमीनों पर हमेशा ही कुछ न कुछ विवाद होता आया है। पर इस बार बात ज्यादा बढ़ गई।

चाचा के निधन के बाद संपत्ति पर शुरू हुआ विवाद

मीडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन पर विवाद चंद्रचूड़ सिंह के चाचा के निधन के बाद शुरू हुआ। दरअसल, पहले वह स्वीडन में रहते थे और फिर जब उनके भाई की मौत हुई, तो वह वापस आकर हवेली में रहने लगे। पर साल 2025 में चंद्रचूड़ सिंह के चाचा भी चल बसे। उसी के बाद परिवार में जमीन और पुश्तैनी हवेली पर आपसी दावेदारी और कब्जे को लेकर लड़ाई होने लगी।

दादा की मौत से एक दिन पहले बनवाई फर्जी वसीयत

वहीं, चंद्रचूड़ सिंह के भाई अभिमन्यु ने बताया कि उनके दादा की मौत से एक दिन पहले फर्जी वसीयत तैयार करवाई गई, जिसमें चाची और घर के लोगों के अलावा बाहर के भी कुछ लोग शामिल हैं। इन्होंने मिलकर पूरे परिवार की सारी जमीनें बेच डालीं और हवेली पर कब्जा जमा लिया। उनके मुताबिक, चाची और उनके बेटे ने फर्जी तरीके से हवेली पर कब्जा किया और जमीनें भी नहीं छोड़ीं। उनकी हवेली ऐतिहासिक है, जिसका नाम 'द जलालपुर एस्टेट' है और यह साल 1870 में बनीथी। अब दर्ज एफआईआर में चंद्रचूड़ सिंह की चाची के अलावा कजन भाई, बहन, दो गवाहों और वकील के अलावा एक विदेशी नागरिक समेत सात लोगों का नाम शामिल है।

कौन हैं चंद्रचूड़ सिंह?

चंद्रचूड़ सिंह एक जाने-माने बॉलीवुड एक्टर हैं। उन्होंने अपने करियर में कई हिट फिल्में दी हैं, जिनमें 'माचिस', 'क्या कहना', 'सिलसिला प्यार का', 'दाग द फायर', 'जोश' और 'आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया' जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने साल 1996 में फिल्म 'तेरे मेरे सपने' से एक्टिंग डेब्यू किया था।