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'अंबर' को जमीं न‍िगल गई या आसमान खा गया? खाकी की मुस्‍तैदी पर उठे सवाल, असम कंपनी का बोर्ड लगाकर चलाता था ठगी धंधा...

'अंबर' को जमीं न‍िगल गई या आसमान खा गया? खाकी की मुस्‍तैदी पर उठे सवाल, असम कंपनी का बोर्ड लगाकर चलाता था ठगी धंधा...

वाराणसी, क्राइम न्यूज। महमूरगंज के रघुनाथ नगर कालोनी स्थित शाही अपार्टमेंट में असम की नामचीन कंपनी 'एनकेडी एंड एसोसिएट्स' का फर्जी बोर्ड लगाकर ट्रेडिंग के जरिए लोगों से ठगी कराने वाले चंदौली के तुलसी आश्रम निवासी सरगना अंबर मौर्या को भेलूपुर पुलिस एक माह बाद भी ढूंढ़ नहीं पाई। 

इसी मामले में पकड़े गए 11 आरोपित युवकों की एक माह बाद भी जमानत नहीं हो पाई है। देश भर में ठगी किए जाने का मामला उजागर होने पर कमिश्नरेट पुलिस की टीम ने भी खूब तेजी दिखाई थी। मीडिया के सामने पीठ थपथपाई, लेकिन सरगना की गिरफ्तारी न होने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

प्रतिबिंब पोर्टल के एक सिपाही ने किया था ठगी का राजफाश

बीते 31 जुलाई को प्रतिबिंब पोर्टल के एक सिपाही ने नौकरी के बहाने स्टिंग किया तो फर्जीवाड़ा की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद सफल आपरेशन हो पाया। दरअसल, बेरोजगार बनकर नौकरी मांगने गए सिपाही को बगैर प्रशिक्षण व डिग्री के काल सेंटर में आठ हजार की नौकरी देने और नए कस्टमर लाने पर इंसेटिव देने पर वहां के लोग राजी हो गए। इस कंपनी से जुड़ी आनलाइन आठ लाख रुपये की ठगी शिकायत थी, जिसके आधार पर सिपाही ने आपरेशन की रणनीति बनाई थी। छापेमारी में म्यूल बैंक खातों से संबंधित अभिलेख मिले हैं।

फरवरी में खुला था आफिस, 1.25 करोड़ रुपये की ठगी

फरवरी में ट्रेडिंग क्षेत्र की नामचीन कंपनी का ब्रांड भुनाने को आफिस खोलकर ठगी शुरू की गई। जांच में 1.25 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। एक ही व्यक्ति से आठ की ठगी कर उसे म्यूल खाते (ऐसा खाता जिसे साइबर ठग भाड़े पर लेकर ठगी के रुपये प्राप्त करते हैं।) में जमा कराए गए थे।

काल सेंटर में ऐसे होता था काम

'एन.के.डी. एंड एसोसिएट्स' के नाम से फर्जी काल सेंटर संचालित हो रहा था। गिरोह इंटरनेट मीडिया पर शेयर में ज्यादा कमाई के टिप्स देने का विज्ञापन देता था। बाजार में निवेश के इच्छुक लोग जब उस विज्ञापन काे देखते तो उनका सारा डेटा कंपनी के पास आ जाता था। इसके बाद कालर की नौकरी कर रहे युवक-युवतियां उन्हें फोन कर टिप्स देते और इसके बदले सब्सक्रिप्शन शुल्क बैंक खातों में क्यूआर कोड और यूपीआइ के जरिए लेते थे।

युवक-युवतियों पर आरोप है, कि बिना किसी ड्रिग्री के लोगों को भ्रमित करते थे। खुद को सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) रजिस्टर्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लाभदायक निवेश और ट्रेडिंग टिप्स देने का झांसा देता थे। इसके लिए उन्हें आठ से 16 हजार रुपये वेतन दिया जाता था।