आज बीएचयू में नए दाखिला लेने वाले छात्रों ने एकेडमिक इंडक्शन प्रोग्राम में म्यूज़ियम का किया भ्रमण...
- भारत की समृद्ध कला परंपराओं से हुए परिचित
वाराणसी, न्यूज 8 अगस्त। आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एमए इंग्लिश में नए दाखिला लेने वाले छात्रों ने एकेडमिक इंडक्शन प्रोग्राम के तहत शनिवार को परिसर स्थित भारत कला भवन (बीकेबी) म्यूज़ियम का भ्रमण किया।
छात्रों का यह भ्रमण कार्यक्रम अनुभव के ज़रिए सीखने (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) पर आधारित था। इस ओरिएंटेशन को असिस्टेंट क्यूरेटर डॉ. प्रियंका चंद्रा और डॉ. दीपक भरथन ने बहुत अच्छे से गाइड किया। उन्होंने म्यूज़ियम की खास चीज़ों के ज़रिए पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों को भारत की समृद्ध कला परंपराओं से परिचित कराया।
इस खास तौर पर तैयार किए गए टूर में छात्रों को कला के कई अहम दौरों को गहराई से समझने का मौका मिला। इसमें मूर्तिकला और टेराकोटा का अवलोकन कर छात्रों ने प्राचीन रिलीफ नक्काशी और मिट्टी की कलाकारी को समझ, जिसमें शुरुआती दौर की क्षेत्रीय महारत दिखाई गई।
इसी तरह मिनिएचर और आधुनिक पेंटिंग में क्लासिकल मुग़ल, पहाड़ी और राजस्थानी मिनिएचर पेंटिंग के साथ-साथ आधुनिक दौर की बेहतरीन कलाकृतियों का अवलोकन छात्रों ने किया। इस क्रम में निधि (खज़ाना) गैलरी में रखी बेशकीमती सजावटी कलाकृतियों को करीब से देखना, जिसमें बारीक कारीगरी और सामग्री में किए गए नए प्रयोगों पर ज़ोर दिया गया।
दुनिया भर में मशहूर चोल काल की कांस्य नटराज मूर्ति पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें उसकी शारीरिक बनावट की सुंदरता, आध्यात्मिक प्रतीकवाद और ढलाई की बेहतरीन कला को उजागर किया गया।
क्यूरेटर टीम ने बताया कि कैसे भौतिक संस्कृति के साथ अलग-अलग विषयों का जुड़ाव साहित्यिक विश्लेषण को समृद्ध करता है। इससे इंग्लिश लिटरेचर के छात्रों को कहानी कहने की कला, ऐतिहासिक संदर्भों और दृश्य प्रस्तुति के बीच समानताएं समझने में मदद मिलती है।
सेशन का समापन एक इंटरैक्टिव सवाल-जवाब सत्र के साथ हुआ, जिससे छात्र अपनी साहित्यिक सोच में दृश्य कला की विरासत को शामिल करने के लिए प्रेरित हुए।