आज से पितृ पक्ष शुरू: तर्पण-श्राद्ध नहीं कर पाएं तो काशी विश्वनाथ और भगवान विष्णु का स्मरण कर ऐसे अर्पित करें जल, पितृ देंगे आशीर्वाद...
Dharm Desk :- आज 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से इस पावन पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। जो 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। ये अवधि पूर्णत: हमारे दिवंगत पितरों की याद उनकी आत्मा की शांति तथा उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी पर आगमन करते हैं और अपने परिजनों द्वारा दिए गए तर्पण एवं आदर को स्वीकार करते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति और पूर्वजों का आशीर्वाद
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जो लोग इस अवधि में भक्ति और श्रद्धा भाव से अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, उनके घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है। पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले धार्मिक कार्यों से पितृ दोष का शमन होता है और परिवार पर आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
गंगाजल और तुलसी का विशेष महत्व
हिंदू धर्म संस्कृति में गंगाजल और पवित्र तुलसी के पौधे का विशेष स्थान है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान गंगाजल से तर्पण करने और तुलसी जी की उपस्थिति में स्मरण करने से पितरों को असीम शांति मिलती है। भगवान काशी विश्वनाथ और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करने का विधान है।
किसी भी घर का सदस्य, चाहे महिला हो, पुरुष हो या बच्चे- अपनी हथेली में पवित्र जल लेकर श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का ध्यान कर सकता है। इस सरल और निष्कपट भक्ति भाव से अर्पण करने पर भी पूर्वजों को परम तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दान और सेवा का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान अन्न दान, वस्त्र दान और गौ सेवा का विशेष फल माना जाता है। निष्काम भाव से जरूरतमंदों को भोजन कराने और पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने से पूर्वज अत्यंत प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि एवं असीम कृपा का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।