वाराणसी के महापौर ने बताया कि आखिर पीएम नरेन्द्र मोदी ने बाढ़ पर किए कैसे सवाल? बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर कही यह बात...
वाराणसी, न्यूज 3 सितंबर। शहर के मेयर अशोक तिवारी के पास गुरुवार की सुबह 10.37 बजे सीधा प्रधानमंत्री का फोन आया तो वह चौंक उठे। बताया कि उस समय वह बाढ़ राहत की तैयारियों की समीक्षा करने और हालात का जायजा लेने के लिए क्षेत्र में ही मौजूद थे कि अचानक फोन की घंटी बजी और उठाने के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी का बाढ़ को लेकर उनसे तीन मिनट तक का संवाद हुआ।
इस बाबत उन्होंने बताया कि "सुबह 10:37 बजे मुझे हमारे नेता, हमारे मार्गदर्शक, भारत के प्रधानमंत्री और हमारे सांसद नरेंद्र मोदी का फ़ोन आया। उस समय हम वार्ड में ही मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा में बाढ़ की स्थिति, पानी कहां-कहां तक पहुंचा है और अलग-अलग जगहों पर क्या हालात हैं, इसके बारे में पूछा।
उन्होंने खास तौर पर दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, ढेलवरिया और नक्की घाट की स्थिति के बारे में और वरुण नदी में पानी का स्तर कहां तक पहुंचा है, इस बारे में जानकारी ली। एक नेता और सांसद का अपने संसदीय क्षेत्र को लेकर इतनी चिंता करना वाकई बहुत बड़ी बात है।" पीएम नरेन्द्र मोदी का बनारस के कोने कोने के बारे में जानकारी होना भी महापौर को अनोखी बात लगी और इसे उन्होंने साझा भी किया।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार की सुबह 10:27 से 10: 36 बजे के बीच महापौर अशोक कुमार तिवारी और इसके बाद जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार से बात की। अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बाढ़ से उत्पन्न हालात के बारे में पूछा। महापौर व जिलाधिकारी ने गंगा और वरुणा में जलस्तर, प्रभावित गांव और मोहल्ले, बाढ़ क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत कार्यों के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने आवश्यक निर्देश और सुझाव दिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन दिन के विदेश दौरे से वापस आने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विषय में जानकारी लेने के लिए सबसे पहले महापौर को गुरुवार की सुबह 10:27 बजे फोन किए। बोले हैलो अशोक जी कैसे हैं। काशी में गंगा और वरुणा में बाढ़ के क्या हालत हैं। प्रधानमंत्री ने जब फोन किया तो महापौर कंदवां, अवलेशपुर में पार्षदों के साथ बाढ़-जलजमाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे थे।
मोदी ने पूछा कि काशी में बाढ़ की क्या स्थिति है। महापौर ने बताया कि सुसवानी, कंचनपुर, कंदवा और सीरगोवर्धन सहित कुछ क्षेत्रों में पानी लगा है। उन्होंने पूछा वरुणा में बाढ़ की क्या स्थिति है। महापौर ने बताया कि आदमपुर, फुलवरिया, नक्कीघाट, सरैया, अलईपुरा सहित तटवर्ती क्षेत्रों में वरुणा का पानी रहवासी क्षेत्रों में आ गया है।
नगर निगम और प्रशासन नागरिकों को राहत पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि, पार्षदों के साथ प्रशासन से समन्वय बनाकर जनता के बीच रहें। कोई शिकायत न आने पाए। दोनों के बीच लगभग साढ़े तीन मिनट तक बात हुई। दोनों के बीच लगभग साढ़े तीन मिनट तक बात हुई।
महापौर से बात के तत्काल बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को फोन आया कि प्रधानमंत्री बात करेंगे। फोन कटा तो जिलाधिकारी कुछ कागजात आदि देखने लगे। इसके 30 सेकेंड बाद ही प्रधानमंत्री का जिलाधिकारी को फोन आ गया। जिलाधिकारी से गंगा के साथ वरुणा में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की विस्तार से जानकारी ली।
डीएम से पूछा कि गंगा का जलस्तर क्या है, इससे वरुणा नदी पर क्या प्रभाव पड़ा है। जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री को बताया कि गंगा अपने चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 30 सेमी ऊपर बह रही हैं। गंगा जी के चेतावनी बिंदु से ऊपर जाने के असर के सवाल पर जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि चेतावनी बिंदु से गंगा जी के ऊपर आने के कारण गंगा का पानी वरुणा में पलट प्रवाह हो रहा है।वरुणा के तटवर्ती 15 मोहल्लों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चल रहे हैं। पीएम ने पूछा कि कितने राहत शिविर खोले गए हैं, उनमें कितने लोग रह रहे हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में 17 राहत शिविर खोले गए हैं जिनमें 1850 लोगों को रखा गया है।
और आगे बताया कि हमारे पास 61 राहत शिविर चिन्हित हैं। आवश्यकता पड़ी तो शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने आगे भी बाढ़ के बने रहने के बारे में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि अभी बारिश हो रही है, इसलिए गंगा जी में पानी बढ़ सकता है। बारिश रुकने पर धीरे धीरे बाढ़ की स्थिति घटने लगेगी।
पीएम मोदी ने कहा..बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का रखें विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि बाढ़ग्रस्त मोहल्लों में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। किसी को तकलीफ न होने पाए। निर्देश दिए कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के राहत के लिए युद्धस्तर पर कार्य करें। समस्त सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराएं। लोगों को कम से कम परेशानी हो इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने बाढ़ और राहत कार्यों पर लगातार सतर्क नजर रखने व प्रभावित लोगों को अविलंब राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। कोई भी जरूरतों हो तो मुझे अवगत कराएं।