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छात्रों की मौत पर सुलगता सवाल: रक्षाबंधन से लौटे अर्पित और IPS के ख्वाब देखने वाले अक्षत समेत 7 मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन?...

छात्रों की मौत पर सुलगता सवाल: रक्षाबंधन से लौटे अर्पित और IPS के ख्वाब देखने वाले अक्षत समेत 7 मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन?...

नईदिल्ली, हादसा कांड। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक जर्जर इमारत के भरभराकर गिरने से हुआ हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक और स्थानीय प्रशासन की आपराधिक लापरवाही का परिणाम है। 

इस दिल दहला देने वाली त्रासदी ने सात मासूम जिंदगियों को लील लिया और पांच परिवारों के उम्मीदों भरे आशियाने हमेशा के लिए उजाड़ दिए। करीब सत्ताईस घंटे चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब मलबा हटाया गया, तो सिस्टम की पोल खुलती चली गई।

सिस्टम की अनदेखी और सुरक्षा के दावों की पोल

सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के हजारों छात्र सीमित हॉस्टल सीटों के अभाव में निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) में रहने को मजबूर हैं। बिना किसी नियमित सुरक्षा जांच और तकनीकी मजबूती के चल रही इन इमारतों पर स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कोई निगरानी नहीं थी। 

अब सवाल यह उठता है कि आखिर किस आधार पर बिना सुरक्षा प्रमाण पत्रों के ये इमारतें छात्रों की जान से खिलवाड़ करती रहीं? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? इस लापरवाही ने साबित कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा अधिकारियों के लिए कभी प्राथमिकता नहीं रही।

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होनहार छात्रों की मौत से उजड़े पांच घर

एम्स में पोस्टमार्टम के बाद सामने आई मृतकों की सूची में दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच प्रतिभाशाली छात्र शामिल हैं, जिनकी उम्र महज 16 से 20 साल के बीच थी।

* मध्य प्रदेश के देवास से ताल्लुक रखने वाले अर्पित राज रक्षाबंधन की छुट्टियां मनाकर कुछ ही घंटे पहले लौटे थे, लेकिन लापरवाह व्यवस्था ने उन्हें हमेशा के लिए छीन लिया।

* कटनी के होनहार छात्र अक्षत यादव फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी और बेहतरीन वक्ता थे, जिनका सपना देश का आईपीएस अधिकारी बनकर समाज की सेवा करना था।

* छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी युवराज सोनी अपने माता-पिता की दवा दुकान के इकलौते सहारे थे।

* इनके अलावा उत्तर प्रदेश के औरैया से मोतीलाल नेहरू कॉलेज के बीएससी छात्र पवन कुमार 

* और सोनभद्र के अभिषेक कुमार की भी इस मलबे में दर्दनाक मौत हो गई।

इन छात्रों के अलावा दो मजदूरों, परम लाल कोरी और सुरेंद्र सिंह, की भी इस हादसे में जान चली गई। वहीं, तीन घायलों की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है और वे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

गिरफ्तारी के नाम पर खानापूर्ति और खौफ में छात्र

हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने मालिक और उनकी पत्नी को न्यायिक हिरासत में भेजा है, जबकि बेटे को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या सिर्फ बिल्डिंग मालिक पर कार्रवाई कर देने से उन भ्रष्ट अधिकारियों की जिम्मेदारी माफ हो जाती है, जिनकी नाक के नीचे यह अवैध और जर्जर निर्माण फल-फूल रहा था?

खौफ के साए में डीयू के छात्र, प्रशासन से सुरक्षा की मांग

इस दर्दनाक हादसे के बाद सत्य निकेतन क्षेत्र के तमाम पीजी में रहने वाले छात्रों में गहरा दहशत और असुरक्षा का माहौल है। जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में छात्र अपना पीजी छोड़कर श्री वेंकटेश्वर कॉलेज पहुंचे हैं, जहां कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल उनके रहने और खाने का अस्थाई इंतजाम किया है। डरे-सहमे छात्रों का कहना है कि उनके पास यह जांचने का कोई साधन नहीं है कि वे जिस छत के नीचे रह रहे हैं, वह सुरक्षित है भी या नहीं, वे ये नहीं जानते। 

छात्रों और पीड़ित परिवारों ने अब सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दिल्ली के सभी पीजी और हॉस्टलों की तत्काल उच्चस्तरीय सुरक्षा जांच कराई जाए, असुरक्षित भवनों को सील किया जाए और इस पूरी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।