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पहाड़ों में मैगी बेचकर हो रही मोटी कमाई, रोज बिकती हैं 200 कप चाय और 70 प्लेट मैगी, रेट और कमाई जानकर उड़ जाएंगे होश...

पहाड़ों में मैगी बेचकर हो रही मोटी कमाई, रोज बिकती हैं 200 कप चाय और 70 प्लेट मैगी, रेट और कमाई जानकर उड़ जाएंगे होश...

Viral Video : रोहतांग दर्रे की बर्फीली वादियों में घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए गरमा-गरम मैगी और चाय किसी खास ट्रीट से कम नहीं होती. ठंड से कांपते सैलानियों को जब पहाड़ों के बीच गर्मागर्म मैगी की प्लेट मिलती है, तो उसका स्वाद ही अलग होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यहां छोटी सी दुकान लगाने वाला दुकानदार कितनी कमाई करता होगा? सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसे ही मैगी बेचने वाले की कहानी चर्चा में है, जिसकी कमाई का आंकड़ा सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ सकते हैं।

इस दिलचस्प कहानी को कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान ने सामने लाया है. हाल ही में वह रोहतांग दर्रे पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक स्थानीय दुकानदार से उसके कारोबार और कमाई के बारे में बातचीत की. दुकानदार की बातें सुनने के बाद हर्ष ने बिक्री का ऐसा हिसाब लगाया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

ऑफ-सीजन में भी रोज बिकती हैं मैगी की 70 प्लेट

हर्ष चौहान ने जब दुकानदार से पूछा कि इन दिनों कारोबार कैसा चल रहा है, तो उसने सामान्य अंदाज में जवाब दिया कि अभी मंदी का दौर है और पहले जैसी भीड़ नहीं रहती. लेकिन जब रोजाना होने वाली बिक्री के बारे में सवाल किया गया, तो तस्वीर कुछ अलग ही निकली।

दुकानदार के मुताबिक, कम पर्यटकों के आने के बावजूद वह प्रतिदिन करीब 60 से 70 प्लेट मैगी बेच लेता है. इसके अलावा उसकी दुकान पर चाय पीने वालों की भी अच्छी खासी भीड़ रहती है. रोजाना लगभग 200 कप चाय की बिक्री हो जाती है. कुछ ग्राहक उबले अंडे और ऑमलेट भी खाना पसंद करते हैं।

मैगी और चाय से ऐसे होता है इतने हजार का कारोबार

अगर दुकानदार की रोजाना बिक्री का हिसाब लगाया जाए, तो कमाई का आंकड़ा काफी दिलचस्प नजर आता है. एक प्लेट मैगी की कीमत 100 रुपये है. इस हिसाब से 60 से 70 प्लेट बेचने पर रोजाना 6,000 से 7,000 रुपये की बिक्री होती है।

वहीं, एक कप चाय के लिए ग्राहकों को 40 रुपये चुकाने पड़ते हैं. रोजाना 200 कप चाय बिकने पर करीब 8,000 रुपये का कारोबार होता है. यानी सिर्फ मैगी और चाय की बिक्री से ही दुकान का टर्नओवर लगभग 14,000 से 15,000 रुपये तक पहुंच जाता है. इसमें अंडे और ऑमलेट से होने वाली कमाई शामिल नहीं है।

कमाई के पीछे छिपी है पहाड़ जैसी मेहनत

हालांकि, इतनी बिक्री देखकर यह मान लेना गलत होगा कि दुकानदार की जेब में रोजाना 15 हजार रुपये बचते हैं. यह उसकी कुल बिक्री है, शुद्ध मुनाफा नहीं. पहाड़ों में कारोबार चलाने के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 

मनाली से रोहतांग तक सामान पहुंचाने में ही प्रतिदिन करीब 2,000 रुपये तक का ट्रांसपोर्ट खर्च हो सकता है. गैस सिलेंडर, राशन और दूसरे जरूरी सामान को ऊंचाई तक पहुंचाना आसान नहीं होता. कई बार भारी सामान पीठ पर लादकर ले जाना पड़ता है. इसके अलावा पीने का पानी जुटाना, ठंड में दुकान संभालना और तेज बर्फीली हवाओं के बीच खाना तैयार करना भी बड़ी चुनौती है।

छोटे कारोबार से भी बनाई जा सकती है बड़ी पहचान

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दुकानदार की कमाई के साथ-साथ उसकी मेहनत की भी चर्चा कर रहे हैं. हर्ष चौहान ने भी इस उदाहरण के जरिए एक अहम बात समझाने की कोशिश की कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता. सही जगह, ग्राहकों की जरूरत और अच्छी सर्विस किसी भी छोटे कारोबार को सफल बना सकती है।

रोहतांग का यह मैगी वाला उदाहरण बताता है कि सफलता के लिए हमेशा बड़े ऑफिस, महंगे शोरूम या भारी निवेश की जरूरत नहीं होती. कई बार एक छोटी सी दुकान और मेहनत करने का जज्बा भी अच्छी कमाई का रास्ता खोल सकता है।